अलग-अलग स्वरूपों में विराजती रही मां
श्री आदिशक्ति दुर्गापूजा परिवार की दुर्गापूजा अपने अलग पूजा विधान और हर वर्ष अलग स्वरूप में मां की प्रतिमा विराजित करने के लिए जानी जाती है। वर्ष 2017 से शुरू हुए इस आयोजन में अलग-अलग वर्षों में देवी के विभिन्न स्वरूपों की प्रतिमाएं स्थापित की गईं।
आयोजकों के अनुसार 2018 में माता पार्वती, 2019 में मां त्रिपुरसुंदरी, 2020 में मां महागौरी, 2021 में श्री अर्धनारीश्वर, 2022 में माता शर्वाणी, 2023 में माता रुद्राणी और 2024 में मां कामाक्षी का स्वरूप स्थापित किया गया। वर्ष 2025 में उज्जैन शक्तिपीठ माता हरसिद्धि और ज्योतिर्लिंग श्री महाकाल की अद्भुत प्रतिमा विराजित की गई थी। इस बार मां मांगल्य गौरिका के स्वरूप को विशेष रूप से तैयार किया गया है।
पहली बार सिंदूर और मिट्टी से बनेगी प्रतिमा
इस वर्ष की दुर्गापूजा में सबसे खास आकर्षण मां मांगल्य गौरिका की सिंदूरी प्रतिमा होगी। आयोजकों के मुताबिक कवर्धा में पहली बार लाल सिंदूर और मिट्टी से बनी मां आदिशक्ति की प्रतिमा को दुर्गापूजा मंडपम में विराजित किया जा रहा है। प्रतिमा को लेकर समिति और श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।
नवरात्रि में होंगे विभिन्न धार्मिक आयोजन
11 अक्टूबर से प्रारंभ होने वाले शारदीय नवरात्र के दौरान श्री आदिशक्ति दुर्गापूजा मंडपम में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें भगवती का आगमन, महानिशा पूजा, फूलार्चन, भव्य सिंदूर महाआरती, हवन और विदाई बेला के कार्यक्रम शामिल हैं। समिति की ओर से नवरात्र के नौ दिनों के लिए अलग-अलग धार्मिक गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
तैयारियों में जुटा दुर्गापूजा परिवार
दुर्गापूजा आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए समिति के सदस्य लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। समिति अध्यक्ष अभिनव तिवारी, संरक्षक डेविड खत्री और प्रकाश देवांगन, समिति आचार्य सुमित भारद्वाज, उपाध्यक्ष दीपक चन्द्रवंशी और देवा चन्द्रवंशी, सचिव संतोष झारिया और बृजमोहन कुंभकार, सह सचिव हेमंत साहू सहित महिला समिति और मोहल्लेवासी आयोजन की तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं।
समिति के अनुसार इस आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक और भक्तिमय वातावरण उपलब्ध कराना तथा मां आदिशक्ति के विभिन्न स्वरूपों की आराधना के माध्यम से नवरात्र पर्व को विशेष रूप से मनाना है। इस बार सिंदूर से बनी मां मांगल्य गौरिका की प्रतिमा आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहने वाली है।