कवर्धा में सड़क चौडीकरण विवाद को लेकर हाईकोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
आवेदक का दावा—आवेदन के निराकरण से पहले ही कार्रवाई की कोशिश, हाईकोर्ट ने 30 दिन में निर्णय का दिया था आदेश
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। कवर्धा शहर में जमीन से जुड़े एक मामले को लेकर नगर पालिका और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता सत्यम शिवम सुंदरम शुक्ला ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद कवर्धा के समक्ष रिमाइंडर आवेदन प्रस्तुत किया है। आवेदन में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के WPC No. 992/2026 के 24 मार्च 2026 के आदेश का हवाला दिया गया है।
दस्तावेज के मुताबिक विवादित भूमि कवर्धा शहर के राजमहल चौक से समनापुर मार्ग के पास स्थित बताई गई है। आवेदन में आवेदक ने अपनी स्वामित्वाधीन भूमि का उल्लेख करते हुए शीट क्रमांक 10-बी, भूखंड क्रमांक 23/6 में 43.19 वर्गमीटर और भूखंड क्रमांक 24 में 5 वर्गमीटर, कुल 48.19 वर्गमीटर भूमि होने की बात कही है।
आवेदन के अनुसार संबंधित भूमि के संबंध में पंजीकृत दानपत्र के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में आवेदक का नाम दर्ज किया गया था। दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि 6 फरवरी 2024 को आवेदक का नाम सामान्य खसरा में दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
कार्रवाई से पहले आपत्ति और आवेदन का दावा
आवेदक का आरोप है कि जमीन से संबंधित कार्रवाई की आशंका को लेकर 13 जनवरी 2026 को आवेदन प्रस्तुत कर प्रभावित लोगों को उचित व्यवस्था, मुआवजा और भूमि अधिग्रहण संबंधी प्रक्रिया अपनाए जाने की मांग की गई थी। आवेदन में यह भी कहा गया कि किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को सूचना और सुनवाई का अवसर दिया जाए।
दस्तावेज में दावा किया गया है कि आवेदन के निराकरण के बिना ही कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की गई और मुख्य द्वार के पास करीब 7.5 फीट तक लाल निशान लगाए जाने का उल्लेख है। इसी को लेकर आवेदक ने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचा। दस्तावेज के मुताबिक मामले में कलेक्टर, राजस्व विभाग, पीडब्ल्यूडी सहित मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पक्षकार बनाया गया था।
24 मार्च 2026 को हाईकोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी को आवेदक द्वारा 13 जनवरी 2026 को प्रस्तुत आवेदन का निराकरण आदेश प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिए जाने का उल्लेख दस्तावेज में है।
आवेदक का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उसके 13 जनवरी 2026 के आवेदन का अभी तक निराकरण नहीं किया गया है। इसी आधार पर 29 सितंबर 2026 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी, कवर्धा के समक्ष रिमाइंडर आवेदन प्रस्तुत कर हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए लंबित आवेदन का शीघ्र निराकरण करने की मांग की गई है।
अब प्रशासन के फैसले पर नजर
मामले में एक ओर आवेदक अपनी भूमि और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज अधिकार का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीन से संबंधित कार्रवाई और सीमांकन को लेकर विवाद सामने आया है। अब मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा हाईकोर्ट के निर्देश के तहत आवेदक के आवेदन पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखने वाली बात होगी।