करवा चौथ पर आचार्य डॉ. अजय आर्य की चुटीली सीख, बोले- जल चढ़ाने से नहीं, मीठा बोलने से बढ़ती है रिश्तों की उम्र

भिलाई में सरलिया परिवार द्वारा करवा चौथ के अवसर पर पारिवारिक सत्संग एवं प्रेरक प्रवचन का आयोजन किया गया। इसमें आचार्य डॉ. अजय आर्य ने हास्यपूर्ण अंदाज में दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और मधुर व्यवहार का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक सौंदर्य बाहरी सजावट में नहीं, बल्कि अच्छे विचारों, संस्कारों और सत्संग में मिलता है। कार्यक्रम में बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर परिवार ने संस्कार और आत्मीयता का संदेश दिया।

Oct 30, 2026 - 07:57
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करवा चौथ पर आचार्य डॉ. अजय आर्य की चुटीली सीख, बोले- जल चढ़ाने से नहीं, मीठा बोलने से बढ़ती है रिश्तों की उम्र

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l करवा चौथ के अवसर पर सरलिया परिवार द्वारा आयोजित पारिवारिक सत्संग एवं प्रेरक प्रवचन में प्रख्यात वैदिक विचारक, लेखक एवं समाजसेवी आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने सहज और चुटीले अंदाज में पारिवारिक जीवन की खुशहाली का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पति की लंबी उम्र की कामना के साथ रिश्तों में प्रेम और मधुर व्यवहार बनाए रखना भी जरूरी है। उनकी बातों ने उपस्थित लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला दी।

आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि करवा चौथ प्रेम, विश्वास और पारस्परिक समर्पण का पर्व है। व्रत रखना व्यक्तिगत आस्था का विषय है, लेकिन दांपत्य जीवन की मजबूती एक-दूसरे के प्रति सम्मान, सहयोग और मधुर व्यवहार से आती है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि पति की लंबी उम्र के लिए केवल जल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि मीठे बोलों की वर्षा करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि दिनभर कड़वे बोल बोलकर शाम को मीठा पानी पिलाने से रिश्तों में मिठास नहीं आती। मीठे शब्द ही संबंधों को मजबूत बनाते हैं।

उन्होंने जीवन के वास्तविक सौंदर्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुंदरता केवल ब्यूटी पार्लर में नहीं, बल्कि सत्संग और अच्छे विचारों में मिलती है। ब्यूटी पार्लर तन को संवारता है, जबकि सत्संग मन को सुंदर बनाने की प्रेरणा देता है। चेहरे की सुंदरता कुछ समय के लिए आकर्षित करती है, लेकिन अच्छे व्यवहार और संस्कारों की छाप जीवनभर बनी रहती है। उन्होंने कहा कि चेहरे पर मेकअप करने से पहले अपने व्यवहार में मिठास का मेकअप करना चाहिए।

आचार्य ने 'सुमन' शब्द का उल्लेख करते हुए कहा कि फूल अपनी सुगंध से वातावरण को महकाता है और ईश्वर को अर्पित किया जाता है। इसी तरह मनुष्य का मन भी प्रेम, करुणा, सद्भाव और परोपकार से सुगंधित होना चाहिए। ईश्वर के चरणों में फूल चढ़ाने से पहले अपने व्यवहार को फूल जैसा कोमल बनाना जरूरी है। उनके अनुसार, पूजा में चढ़ाया गया फूल कुछ समय बाद मुरझा जाता है, लेकिन प्रेम से बोला गया एक वाक्य किसी के हृदय में लंबे समय तक बना रहता है।

पारिवारिक जीवन में संवाद और सहजता का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि घर ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां प्रत्येक सदस्य को शांति और अपनापन महसूस हो। रिश्तों में हर बात का हिसाब रखने के बजाय एक-दूसरे की भावनाओं को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिश्ते बैंक खाते नहीं हैं, जिनमें हर बात का डेबिट-क्रेडिट रखा जाए। रिश्तों में प्रेम जमा करना चाहिए और क्षमा के माध्यम से विश्वास की पूंजी बढ़ानी चाहिए।

उन्होंने मां, प्रकृति और बुजुर्गों के सम्मान पर भी विशेष जोर दिया। आचार्य ने कहा कि मां और प्रकृति दोनों जीवनदायिनी हैं। मां की भावनाओं का सम्मान करना और उनकी सेवा करना प्रत्येक संतान का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि जिस घर में बुजुर्गों की आंखों में सम्मान और चेहरे पर संतोष होता है, उस घर की समृद्धि को धन-दौलत से नहीं मापा जा सकता।

कार्यक्रम में जे. पी. सरलिया, संजीव पोद्दार, दिलीप अग्रवाल, संजय अग्रवाल, गोपाल उगरा, दीपक अग्रवाल, संजू पोद्दार, अनीता अग्रवाल, मीनू अग्रवाल, उमा सरलिया, रोली उगरा, सोनल सरलिया, प्राची पोद्दार, उदित सरलिया, महिमा उगरा, इशिका सरलिया, अक्रिश सरलिया और इतिशा पोद्दार सहित परिवार के सदस्यों ने सहभागिता की। इस दौरान बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर परिवार ने भारतीय परंपरा, संस्कार और पीढ़ियों के बीच आत्मीय संबंधों का संदेश दिया।

आचार्य डॉ. अजय आर्य ने अपने संदेश में कहा कि चेहरे की सुंदरता आंखों को अच्छी लगती है, लेकिन मन की सुंदरता जीवन को सुंदर बनाती है। करवा चौथ पर चांद का दीदार करने के साथ जीवनसाथी के मन में प्रेम बनाए रखना भी जरूरी है। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सुखी परिवार की असली पूंजी प्रेम, विश्वास, संस्कार, बुजुर्गों का आशीर्वाद और एक-दूसरे के प्रति सम्मान है।