दुर्ग: CA की पढ़ाई के लिए साक्षी को मिला ₹63 हजार का सहयोग, अध्यात्म पथ सेवा परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल

दुर्ग की साक्षी शर्मा चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने का सपना पूरा करने के लिए नौकरी के साथ पढ़ाई कर रही हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बीच उनकी मदद के लिए अध्यात्म पथ सेवा परिवार और सहयोगियों ने मिलकर ₹63,000 की सहायता जुटाई। रायपुर के महेंद्र नाहटा स्वयं दुर्ग पहुँचकर साक्षी को सहायता का चेक सौंपने आए। आचार्य डॉ. अजय आर्य के मार्गदर्शन और समाजसेवियों के सहयोग से हुए इस प्रयास ने मानवता, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी की प्रेरक मिसाल पेश की।

Oct 24, 2026 - 08:51
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दुर्ग: CA की पढ़ाई के लिए साक्षी को मिला ₹63 हजार का सहयोग, अध्यात्म पथ सेवा परिवार ने पेश की मानवता की मिसाल

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l “इंसान को इंसान रहने दें, इंसान बनना बहुत कठिन है”—आचार्य डॉ. अजय आर्य का यह संदेश मानवता और परोपकार की भावना को उजागर करता है। दुर्ग की साक्षी शर्मा की चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनने की राह आसान बनाने के लिए अध्यात्म पथ सेवा परिवार और समाजसेवियों ने एकजुट होकर ₹63,000 की आर्थिक सहायता जुटाई। इस पहल ने साबित किया कि सामूहिक प्रयासों से किसी जरूरतमंद के सपनों को नई उड़ान दी जा सकती है।

साक्षी शर्मा नौकरी करते हुए अपने परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाती हैं और समय निकालकर CA की पढ़ाई कर रही हैं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उनका लक्ष्य के प्रति समर्पण कायम है। पढ़ाई के लिए आवश्यक धन जुटाने में कठिनाई आने पर उन्हें समाज के सहयोग की जरूरत थी। ऐसे समय में संवेदनशील लोगों ने आगे आकर उनकी मदद का बीड़ा उठाया।

साक्षी की परिस्थिति से परिचित होने के बाद हेमा सक्सेना ने आचार्य डॉ. अजय आर्य से चर्चा की। इसके बाद अध्यात्म पथ सेवा परिवार के सदस्यों और अन्य सहयोगियों से संपर्क किया गया। सभी ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार योगदान दिया और साक्षी की पढ़ाई के लिए कुल ₹63,000 की सहायता राशि जुटाई।

इस प्रयास में रायपुर के महेंद्र नाहटा ने विशेष पहल की। उन्होंने अपने पिता पारसमल नाहटा से मिले संस्कारों को याद करते हुए जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा साझा की। लक्ष्मी रणछोड़ धर्मार्थ न्यास की ओर से सहायता का चेक लेकर महेंद्र नाहटा स्वयं रायपुर से दुर्ग पहुँचे और साक्षी शर्मा को सौंपा। इस कार्य में बलराम भाई चावड़ा का भी योगदान रहा। यह पहल केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रही, बल्कि जरूरतमंद की परिस्थितियों को समझते हुए उसके पास स्वयं पहुँचने की संवेदनशीलता का उदाहरण भी बनी।

हेमा सक्सेना ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें समाज में मौजूद अच्छाइयों और मानवीय संवेदनाओं को करीब से देखने का अवसर दिया। लक्ष्मी जेठानी ने परोपकार को धर्म का सच्चा रास्ता बताते हुए कहा कि जीवन दूसरों की राह आसान बनाने के लिए भी है। वसंत आर्य ने कहा कि किसी विद्यार्थी की शिक्षा में किया गया सहयोग उसके सपनों के साथ समाज के उज्ज्वल भविष्य में निवेश है। शिपी आर्य ने भी दूसरों के सपनों को अपना समझकर सहयोग करने को इंसानियत का वास्तविक संस्कार बताया।

आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि कठिन समय में किसी की सहायता करना मानवीय कर्तव्य है। उन्होंने साक्षी को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उसकी सफलता सभी सहयोगियों के लिए सबसे सुंदर उपहार होगी। साक्षी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए संकल्प लिया कि भविष्य में सफल होने पर वह भी किसी जरूरतमंद की मदद करने का प्रयास करेंगी।

इस पुनीत कार्य में लक्ष्मी रणछोड़ धर्मार्थ न्यास, महेंद्र नाहटा, बलराम भाई चावड़ा, रीता ललित देशपांडे, बिंदु शिवराजन, विकास विनायक, हेमा सक्सेना, नेहा दुबे, सुनीता खिरबत, वसंत वर्मा, शिपी आर्य, ऋषभ, लक्ष्मी जेठानी तथा अध्यात्म पथ सेवा परिवार के अन्य सदस्यों का योगदान रहा।

साक्षी की कहानी बताती है कि किसी के सपनों को सहारा देने के लिए हमेशा बड़े अभियान की जरूरत नहीं होती। कभी आर्थिक मदद, कभी संवेदनशील पहल और कभी किसी के संघर्ष को समझना ही उसके जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा सकता है।