सहसपुर लोहारा में दशहरा उत्सव: 84 गांवों और राजपरिवार का रिश्ता आज भी कायम, पारंपरिक राजदरबार में उमड़ी भीड़

छत्तीसगढ़ के सहसपुर लोहारा में विजयादशमी पर राजपरिवार की वर्षों पुरानी दशहरा परंपरा का निर्वहन किया गया। राजा खड्ग राज कुमार सिंह ने राजमाता का आशीर्वाद लेकर नगर भ्रमण किया और पूर्वजों द्वारा स्थापित मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। रावण दहन के बाद राजपरिवार की कुलदेवी मां काली कंकालिन दाई के दर्शन और श्रीराम मंदिर में आरती की गई। इसके बाद राजमहल में पारंपरिक राजदरबार सजा, जहां 84 गांवों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने राजा से मुलाकात कर दशहरा की शुभकामनाएं दीं। बदलते समय के बावजूद यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और सामाजिक आत्मीयता का प्रतीक बना हुआ है।

Oct 24, 2026 - 08:57
 0  2
सहसपुर लोहारा में दशहरा उत्सव: 84 गांवों और राजपरिवार का रिश्ता आज भी कायम, पारंपरिक राजदरबार में उमड़ी भीड़

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l व्यवस्था बदली, वक्त बदला और पीढ़ियां भी बदल गईं, लेकिन सहसपुर लोहारा राजपरिवार और क्षेत्र के 84 गांवों के बीच पीढ़ियों से चला आ रहा आत्मीय रिश्ता आज भी कायम है। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित पारंपरिक दशहरा उत्सव में इस ऐतिहासिक संबंध और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। राजमहल में सजे पारंपरिक दरबार में सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर राजा खड्ग राज कुमार सिंह से मुलाकात की और दशहरा की शुभकामनाएं दीं।

दशहरा की वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए राजा खड्ग राज कुमार सिंह ने सबसे पहले राजमाता का आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे राजमहल से नगर भ्रमण के लिए निकले। इस दौरान रास्ते में क्षेत्रवासियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया और लोगों से भेंट-मुलाकात हुई।

नगर भ्रमण के दौरान राजा ने अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित श्रीराम मंदिर, लक्ष्मी मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर और शीतला माता मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इस अवसर पर क्षेत्र के 84 गांवों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की गई। इसके बाद दशहरा मैदान में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों के बीच परंपरागत रूप से रावण दहन किया गया।

रावण दहन के बाद राजा राजपरिवार की कुलदेवी मां काली कंकालिन दाई के दरबार पहुंचे और दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात श्रीराम मंदिर में आरती की गई और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। राजमहल लौटने पर राजमाता और राजपरिवार के सदस्यों ने राजा की आरती उतारकर उनका स्वागत किया। इस दौरान पारिवारिक परंपराओं और धार्मिक आस्था का भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला।

इसके बाद राजमहल में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार राजदरबार सजा। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से पहुंचे सैकड़ों लोगों ने राजा से मुलाकात कर विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। राजा खड्ग राज कुमार सिंह ने भी लोगों से आत्मीयता के साथ बातचीत की। परंपरा के अनुसार प्रत्येक आगंतुक को पान भेंट किया गया। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन के प्रति क्षेत्रवासियों के लगाव को दर्शाया।

राजतंत्र भले ही इतिहास का हिस्सा बन चुका है, लेकिन उससे जुड़े सामाजिक और भावनात्मक संबंध आज भी जीवित हैं। सहसपुर लोहारा का दशहरा इसी विरासत का प्रतीक है, जहां राजा और प्रजा का पारंपरिक संबोधन अब शासन व्यवस्था से अधिक सम्मान, विश्वास और अपनत्व के रिश्ते को दर्शाता है।

यह आयोजन केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वजों की विरासत को याद करने, संस्कृति को सहेजने और 84 गांवों के साथ पीढ़ियों पुराने संबंधों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी है। सहसपुर लोहारा की यह परंपरा आज भी लोगों को राजमहल से जोड़ती है और संदेश देती है कि समय के साथ व्यवस्थाएं बदल सकती हैं, लेकिन परंपरा, विश्वास और अपनापन कायम रह सकते हैं।