रायपुर प्रेस क्लब में दिलीप षडंगी के जस गीतों ने बांधा समां

रायपुर प्रेस क्लब में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में जस गीत सम्राट दिलीप षडंगी ने अपनी भक्तिमय प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोक संगीत, जस गीतों की परंपरा और अपने संगीत सफर पर चर्चा की। साथ ही स्थानीय कलाकारों को अधिक अवसर, सम्मान और आर्थिक सहयोग देने की अपील की। कार्यक्रम में प्रेस क्लब के पदाधिकारी और पत्रकार उपस्थित रहे।

Oct 13, 2026 - 09:50
 0  4
रायपुर प्रेस क्लब में दिलीप षडंगी के जस गीतों ने बांधा समां

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l नवरात्रि के पावन अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध जस गीत गायक एवं जस गीत सम्राट दिलीप षडंगी ने अपनी भक्तिमय प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रेस क्लब का वातावरण माता के जस गीतों से गूंज उठा। इस अवसर पर दिलीप षडंगी ने पत्रकारों से आत्मीय चर्चा करते हुए अपने संगीत सफर, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, जस गीतों की परंपरा और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर विस्तार से विचार साझा किए।

कार्यक्रम में दिलीप षडंगी ने बताया कि संगीत के प्रति उनका लगाव शुरू से ही रहा है। संगीत की साधना करते हुए उनका जुड़ाव धीरे-धीरे माता की भक्ति से होता चला गया। इसी दौरान उनके मन में माता की आराधना से जुड़े गीतों के विचार आने लगे। जब उन्होंने इन गीतों को अपनी आवाज दी, तो श्रोताओं ने उन्हें खूब पसंद किया। जस गीतों की लोकप्रियता ने उन्हें छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भी विशेष पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि संगीत और माता की भक्ति का यह संगम उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

दिलीप षडंगी ने छत्तीसगढ़ी जस गीतों की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए कहा कि इन गीतों में श्रद्धा, आस्था और भक्ति की अद्भुत शक्ति समाहित है। माता के जस गीत सुनते ही श्रद्धालु भक्ति में झूमने लगते हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में भी जस गीतों को श्रोताओं का भरपूर प्यार मिलता है। यह छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की लोकप्रियता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।

चर्चा के दौरान उन्होंने स्थानीय लोक कलाकारों की स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की। दिलीप षडंगी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भक्ति संगीत, लोक गायन और पारंपरिक कला के क्षेत्र में अनेक प्रतिभाशाली कलाकार मौजूद हैं। इसके बावजूद कई आयोजनों में स्थानीय कलाकारों की अपेक्षा बाहरी कलाकारों को प्राथमिकता दी जाती है और उन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। उन्होंने आयोजकों से अपील की कि प्रदेश की कला और संस्कृति को जीवित रखने के लिए छत्तीसगढ़ी कलाकारों को अधिक अवसर प्रदान किए जाएं।

उन्होंने राज्य सरकार से भी लोक कलाकारों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि कलाकारों को उचित मंच, सम्मान और आर्थिक सहयोग मिलना चाहिए। विशेष रूप से जरूरतमंद लोक कलाकारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे अपनी कला को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिलने से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और अधिक मजबूत होगी।

कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के विशेष आग्रह पर दिलीप षडंगी ने अपने लोकप्रिय जस गीतों की प्रस्तुति भी दी। उन्होंने ‘आमा पान के पतरी, करेला पान के दोना’ और ‘कोरी-कोरी नारियल चढ़े’ जैसे प्रसिद्ध जस गीत सुनाए। उनकी सुमधुर आवाज और भक्तिमय गीतों ने उपस्थित पत्रकारों को मंत्रमुग्ध कर दिया। माता की आराधना से जुड़े इन गीतों के माध्यम से पूरे प्रेस क्लब परिसर में भक्तिमय वातावरण निर्मित हो गया।

इस अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यादव, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू और भूपेश जांगड़े सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। सभी ने दिलीप षडंगी के संगीत सफर और छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के संरक्षण से जुड़े विचारों को सुना।

रायपुर प्रेस क्लब का ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम इस अवसर पर लोक संगीत, सांस्कृतिक संवाद और माता की भक्ति का विशेष संगम बन गया। दिलीप षडंगी ने अपनी प्रस्तुतियों और विचारों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों को सम्मान एवं प्रोत्साहन देने का संदेश दिया। नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदेश की समृद्ध लोक परंपराओं और भक्ति संगीत के महत्व को भी रेखांकित किया।