दुर्ग के वृद्धाश्रम में राम नाम संकीर्तन, भक्तिरस में सराबोर हुए बुजुर्ग

नवरात्रि के पावन अवसर पर दुर्ग के पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम में राधा कृष्णालय लोक न्यास, कुशालपुर रायपुर द्वारा राम नाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। लगभग एक घंटे तक चले संकीर्तन में श्रद्धालुओं ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में सरोज यादव और आचार्य डॉ. अजय आर्य ने राम नाम स्मरण, गुरु कृपा, सद्भाव, करुणा और सेवा के महत्व पर विचार रखे। अंत में प्रसाद वितरण के साथ आयोजन संपन्न हुआ।

Oct 13, 2026 - 10:42
 0  2
दुर्ग के वृद्धाश्रम में राम नाम संकीर्तन, भक्तिरस में सराबोर हुए बुजुर्ग

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l नवरात्रि के पावन अवसर पर पुलगांव स्थित वृद्धाश्रम में राम नाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। राधा कृष्णालय लोक न्यास, कुशालपुर रायपुर की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में जगद्गुरु भावानंद पीठाधीश्वर अभिरामदास जी देवाचार्य के शिष्यों ने संकीर्तन प्रस्तुत किया। राम नाम के मधुर स्मरण और भक्ति गीतों से वृद्धाश्रम का वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में शामिल बुजुर्गों ने आध्यात्मिक माहौल का अनुभव किया और श्रद्धा के साथ संकीर्तन में सहभागिता की।

राम नाम स्मरण से मिलता है मन को संबल

कार्यक्रम के दौरान सरोज यादव ने राम नाम स्मरण के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भवसागर से पार उतरने के लिए राम नाम का स्मरण अत्यंत सार्थक है। यह मन को स्थिरता, विश्वास और संबल प्रदान करता है। उनके अनुसार, राम नाम केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को सद्भाव, करुणा और सेवा जैसे जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी देता है। आध्यात्मिक साधना का वास्तविक उद्देश्य अपने विचारों और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना है।

लगभग एक घंटे तक चले इस संकीर्तन में सरोज यादव, तनु शर्मा, बिंदेश्वरी साहू, ऋषिका ठाकुर, तारिणी ठाकुर, रानी ठाकुर, सिंधु ताम्रकार और नीलिमा गुप्ता ने सहभागिता की। भक्ति गीतों और राम नाम के स्मरण के बीच कार्यक्रम में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

गुरु कृपा का अर्थ जीवन में सकारात्मक बदलाव

इस अवसर पर आचार्य डॉ. अजय आर्य ने गुरु कृपा और ईश्वर स्मरण के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु कृपा का वास्तविक अर्थ जीवन में सकारात्मक प्रगति करना है। गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा तभी सार्थक होती है, जब उनके मार्गदर्शन से व्यक्ति के विचार और व्यवहार बेहतर बनें। उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर का स्मरण तभी सार्थक है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के आचरण में दिखाई दे और वह दूसरों के प्रति संवेदनशील बने।

आचार्य डॉ. अजय आर्य ने देवता और असुर की प्रवृत्तियों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि देवता वह है, जिसके हाथ दूसरों की सहायता के लिए आगे बढ़ते हैं, जबकि आसुरी प्रवृत्ति केवल संग्रह करना जानती है। उन्होंने संदेश दिया कि मनुष्य की श्रेष्ठता केवल धन या वस्तुओं के संग्रह में नहीं, बल्कि दूसरों के काम आने और जरूरतमंदों की सहायता करने में है।

आत्मचिंतन और सेवा का संदेश

कार्यक्रम में हेमा सक्सेना ने कहा कि संकीर्तन से मन भावुक हुआ और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त हुई। उन्होंने ऐसे आयोजनों को आत्मचिंतन का अवसर बताया। कार्यक्रम के माध्यम से राम नाम स्मरण के साथ सेवा, करुणा, सद्भाव और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया गया।

नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने वृद्धाश्रम में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया। संकीर्तन के समापन पर उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद वितरण किया गया। इस तरह भक्ति, गुरु मार्गदर्शन और सेवा भावना के संदेश के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।