Crude Oil Price: तनाव के बीच 2% तक गिरा कच्चा तेल, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम पर क्या होगा असर?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 12 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI क्रूड की कीमतों में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल की सप्लाई को लेकर चिंताओं के बावजूद कच्चे तेल के दाम नीचे आए। भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये-डॉलर की विनिमय दर और तेल कंपनियों की लागत के आधार पर भविष्य में घरेलू कीमतों पर असर पड़ सकता है।

Oct 12, 2026 - 13:40
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Crude Oil Price: तनाव के बीच 2% तक गिरा कच्चा तेल, भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम पर क्या होगा असर?

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI क्रूड के भाव करीब 2 प्रतिशत तक नीचे आ गए। इस गिरावट के बावजूद क्षेत्र में जारी तनाव के कारण आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में फिर तेजी आने की आशंका बनी हुई है। वहीं, भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने सोमवार को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।

ब्रेंट और WTI क्रूड के भाव में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.97 प्रतिशत गिरकर 102.676 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड का भाव 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के बाद 89.997 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया। तेल की कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब मिडिल ईस्ट में तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों और तेल कारोबारियों की नजर क्षेत्र के घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

सऊदी अरब में हमले की खबर से बढ़ा तनाव

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर ईरान समर्थित हूतियों के हमले की खबर सामने आने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका जताई गई। खबर में इस हमले में 12 से अधिक लोगों की मौत और 300 से ज्यादा लोगों के घायल होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। क्षेत्र में किसी भी बड़े सैन्य घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे उत्पादन, परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने का जोखिम रहता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बाजार की नजर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने या टैंकरों पर हमलों का खतरा बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सोहार बंदरगाह के पास एक टैंकर पर ड्रोन हमले की खबर का भी उल्लेख किया गया है। ऐसी परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है और कीमतों में तेजी आ सकती है। हालांकि, सोमवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल के दाम गिरावट के साथ रहे।

भारत में पेट्रोल-डीजल पर कितना असर?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर देश के आयात बिल और तेल कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, कच्चे तेल के दाम घटने या बढ़ने का असर पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतों पर तुरंत और उसी अनुपात में दिखाई देना जरूरी नहीं है। रुपये और डॉलर की विनिमय दर, कंपनियों की लागत और अन्य कारक भी खुदरा कीमतों को प्रभावित करते हैं।

फिलहाल, 12 अक्टूबर को सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया। इसलिए उपभोक्ताओं को तत्काल राहत या बढ़ोतरी के रूप में कोई नया बदलाव देखने को नहीं मिला। आगे कीमतों में क्या रुख रहेगा, यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल और मिडिल ईस्ट के हालात पर निर्भर करेगा।