छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान देगा ‘चेन्दरू’ पुरस्कार, विजेता को मिलेगा एक लाख रुपये

छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ शुरू किया है। पुरस्कार के तहत चयनित व्यक्ति या संस्था को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। होमस्टे, स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक धरोहर, सामुदायिक भागीदारी और सतत ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।

Oct 7, 2026 - 08:58
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छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान देगा ‘चेन्दरू’ पुरस्कार, विजेता को मिलेगा एक लाख रुपये

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के गांवों की संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल की है। पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उत्कृष्ट और प्रभावी कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ की शुरुआत की है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए गए हैं।

इस पुरस्कार के तहत ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चयनित व्यक्ति या संस्था को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। योजना का उद्देश्य केवल उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को स्थानीय रोजगार, आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास से जोड़ना भी है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक विरासत की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक भी पहुंचे। ग्रामीण पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ उन व्यक्तियों और संस्थाओं को पहचान देने का माध्यम बनेगा, जो जमीनी स्तर पर पर्यटन के जरिए अपने गांव और क्षेत्र को नई पहचान दिलाने का काम कर रहे हैं। होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर तथा समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहन देकर छत्तीसगढ़ ग्रामीण पर्यटन का विशिष्ट मॉडल विकसित कर सकता है।

पुरस्कार का नाम ‘चेन्दरू’ भी छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान से जुड़ा है। चेन्दरू ने बस्तर और यहां के सहज प्राकृतिक जीवन को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। इसी नाम से शुरू किया गया यह पुरस्कार अब ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जमीनी स्तर के लोगों और संस्थाओं को सम्मानित करेगा।

नियमों के अनुसार चयनित व्यक्ति या संस्था को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। किसी व्यक्ति को यह सम्मान उसके जीवनकाल में केवल एक बार दिया जा सकेगा। पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन छह सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया जाएगा। जूरी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध निदेशक करेंगे। मूल्यांकन में ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्य, उसका प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन तथा संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा।

पुरस्कार के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर प्रविष्टियां आमंत्रित की जाएंगी। आवेदकों को अपनी प्रोफाइल, फोटोग्राफ, छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों और उपलब्धियों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

चयनित विजेता या संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही विजेता के कार्यों, नवाचारों और उपलब्धियों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी। इससे ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय प्रयासों को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति से लेकर ग्रामीण अंचलों के पारंपरिक व्यंजन, लोककला, हस्तशिल्प, मेले, पर्व, प्राकृतिक स्थल और स्थानीय जीवनशैली तक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। होमस्टे और सामुदायिक पर्यटन के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव कराने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।

‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के जरिए ग्रामीण पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार, सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।