बस्तर के जनजातीय बच्चे देश को दिखा रहे नई राह, जावंगा एजुकेशन सिटी से शिक्षा और रोजगार की नई उड़ान

दंतेवाड़ा की जावंगा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरी है। यहां दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले बच्चों को आवास, भोजन, शिक्षा और मार्गदर्शन की सुविधाएं मिल रही हैं। छात्राओं ने NEET-UG में सफलता हासिल कर मेडिकल शिक्षा में प्रवेश लिया है, जबकि नवगुरुकुल से प्रशिक्षित युवा डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। एजुकेशन सिटी में खेल प्रशिक्षण और बालिका शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

Sep 29, 2026 - 18:01
 0  3
बस्तर के जनजातीय बच्चे देश को दिखा रहे नई राह, जावंगा एजुकेशन सिटी से शिक्षा और रोजगार की नई उड़ान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में स्थित जावंगा की अटल बिहारी वाजपेयी एजुकेशन सिटी जनजातीय बच्चों के लिए शिक्षा, कौशल, खेल और आत्मविश्वास का केंद्र बन रही है। दूरस्थ गांवों और जंगलों से आने वाले बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई के साथ आवास, भोजन, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

करीब 150 एकड़ में फैली इस एजुकेशन सिटी में स्कूल शिक्षा, आवासीय शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा से जुड़े संस्थान संचालित हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परिसर में 43 शैक्षणिक और आवासीय संस्थाएं हैं, जहां 7,436 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें 4,692 बालिकाएं शामिल हैं, जबकि 5,370 विद्यार्थी छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में यहां की छात्राओं ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। छू लो आसमान कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर, कारली की कई छात्राओं ने इस वर्ष NEET-UG में सफलता हासिल की है। इन विद्यार्थियों को शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, आयुर्वेद, दंत चिकित्सा और पशु चिकित्सा जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश मिला है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली इन बेटियों के लिए यह उपलब्धियां उच्च शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।

डिजिटल शिक्षा से रोजगार की ओर कदम

जावंगा एजुकेशन सिटी में डिजिटल कौशल को भी प्राथमिकता दी जा रही है। नवगुरुकुल के माध्यम से युवाओं को डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्रोत के अनुसार यहां से प्रशिक्षित करीब 100 युवाओं को प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार मिल चुका है। एक छात्रा का चयन S&P Global में डेटा एनालिटिक्स के पद पर हुआ है।

आईटीआई में डीजल मैकेनिक, फिटर, वेल्डर और इलेक्ट्रिकल जैसे ट्रेड में भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्रोत के अनुसार इन ट्रेड में प्रशिक्षण लेने वाले करीब 95 प्रतिशत विद्यार्थी जनजातीय समुदाय से हैं।

खेलों में भी प्रतिभाओं को अवसर

पढ़ाई के साथ खेलों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। एकलव्य खेल परिसर में स्विमिंग पूल, हॉर्स राइडिंग, तीरंदाजी और इंडोर स्टेडियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। खेलो इंडिया से जुड़े इस परिसर में करीब 4,000 आदिवासी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं।

बालिका शिक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। स्वामी आत्मानंद स्कूल में करीब 1,200 छात्राएं कला, विज्ञान और वाणिज्य की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। वहीं आस्था विद्या मंदिर में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

स्रोत के अनुसार जावंगा एजुकेशन सिटी की पहल को KPMG द्वारा दुनिया की 100 नवोन्मेषी परियोजनाओं में शामिल किया गया है। दंतेवाड़ा प्रशासन को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जावंगा दौरे का भी स्रोत में उल्लेख किया गया है।

जावंगा एजुकेशन सिटी की कहानी बताती है कि शिक्षा, कौशल और खेल के अवसर दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को आगे बढ़ने के नए रास्ते उपलब्ध करा सकते हैं।