आंजनेय यूनिवर्सिटी में ब्लू इकोनॉमी पर दो दिवसीय एआईसीटीई प्रायोजित अटल कार्यक्रम आयोजित

रायपुर की आंजनेय यूनिवर्सिटी में फैकल्टी ऑफ साइंस के गणित एवं जूलॉजी विभाग द्वारा एआईसीटीई प्रायोजित अटल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “ब्लू इकोनॉमी : ए पाथवे टू सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड इंडियाज़ इकोनॉमिक ग्रोथ” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में जल संरक्षण, समुद्री ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन, कोरल रीफ संरक्षण, सतत मत्स्य पालन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। समापन अवसर पर बीएससी विद्यार्थियों ने लोक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी।

Oct 7, 2026 - 18:43
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आंजनेय यूनिवर्सिटी में ब्लू इकोनॉमी पर दो दिवसीय एआईसीटीई प्रायोजित अटल कार्यक्रम आयोजित

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर। आंजनेय यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ साइंस के डिपार्टमेंट ऑफ मैथमेटिक्स एवं डिपार्टमेंट ऑफ जूलॉजी द्वारा एआईसीटीई प्रायोजित अटल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “ब्लू इकोनॉमी : ए पाथवे टू सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड इंडियाज़ इकोनॉमिक ग्रोथ” विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में ब्लू इकोनॉमी के विभिन्न आयामों के साथ जल एवं समुद्री संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत विकास में उनकी भूमिका पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार साझा किए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. एल. के. परगनिहा, गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. एन. मरिमुथु, डायरेक्टर जनरल डॉ. बी. सी. जैन, कुलपति डॉ. टी. रामाराव, डायरेक्टर डॉ. जयेंद्र नारंग, डायरेक्टर एकेडमिक्स डॉ. संध्या वर्मा और रजिस्ट्रार डॉ. रुपाली चौधरी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ब्लू इकोनॉमी को जल एवं समुद्री संसाधनों के संरक्षण तथा आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण अवधारणा बताया।

कुलपति डॉ. टी. रामाराव ने ब्लू इकोनॉमी को सतत विकास और भारत की आर्थिक प्रगति की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने जल एवं समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि समुद्री जैव विविधता का संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सतत मत्स्य पालन जैसे क्षेत्र ब्लू इकोनॉमी के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक संभावनाओं को भी मजबूत किया जा सकता है।

कार्यक्रम के पहले दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में डॉ. एन. मरिमुथु ने कोरल रीफ संरक्षण एवं तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता पर व्याख्यान दिया। डॉ. राजेश कुमार राय ने नवीकरणीय समुद्री ऊर्जा, डॉ. रंजू गुप्ता ने जल संसाधन प्रबंधन और डॉ. पार्वती पटेल ने सतत मत्स्य पालन विषय पर अपने विचार रखे। इन सत्रों में जल एवं समुद्री संसाधनों के संरक्षण, उनके जिम्मेदार उपयोग और सतत विकास में उनकी भूमिका पर चर्चा हुई।

दूसरे दिन श्री प्रहलाद ने जल संरक्षण एवं प्रबंधन और सतत विकास के संबंध में विचार साझा किए। डॉ. राज किशोर चौधरी ने सतत पर्यावरण एवं विकास, जबकि प्रो. अनुभूति कौशले ने जल स्थिरता एवं पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। अंतिम सत्र में एस. के. राजीव नायर, डीन, सीएसआईटी, दुर्ग ने “बीकम द बेस्ट वर्जन ऑफ योरसेल्फ” विषय पर इंटरैक्टिव एवं प्रेरणादायी सत्र लिया। इसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

दो दिवसीय कार्यक्रम के समापन अवसर पर बीएससी विद्यार्थियों ने लोक नृत्य की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। पारंपरिक लोक संस्कृति से जुड़ी इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का वातावरण बनाया। उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों और प्रतिभागियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान कोरल रीफ संरक्षण, नवीकरणीय समुद्री ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन, सतत मत्स्य पालन, जल संरक्षण एवं प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और व्यक्तिगत विकास जैसे विषयों पर अकादमिक विमर्श हुआ। दो दिनों के इस आयोजन ने प्रतिभागियों को ब्लू इकोनॉमी के वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक पक्षों को समझने का अवसर दिया। कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक लोक नृत्य प्रस्तुति और वैलिडिक्टरी सत्र के साथ हुआ।