अहोई अष्टमी आज: प्रदोष काल में जलाएं शिव-शक्ति के निमित्त दो दीपक, संतान की खुशहाली के लिए करें विशेष पूजा

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती के निमित्त दो दीपक जलाकर पूजा की जा सकती है। माता पार्वती को लंबी बत्ती और भगवान शिव को गोल बत्ती का दीपक समर्पित करने की परंपरा बताई गई है। जानिए पूजा की विधि और दीपदान के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Nov 1, 2026 - 14:16
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अहोई अष्टमी आज: प्रदोष काल में जलाएं शिव-शक्ति के निमित्त दो दीपक, संतान की खुशहाली के लिए करें विशेष पूजा

UNITED NEWS OF ASIA. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में शिव-शक्ति के निमित्त दो दीपक जलाकर परिवार और संतान की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जा सकती है।

मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा से परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। अहोई अष्टमी के अवसर पर प्रदोष काल में दीपदान करने की विशेष परंपरा बताई गई है। इसके लिए श्रद्धालु नजदीकी शिव मंदिर में जाकर भगवान शंकर और माता पार्वती का स्मरण करते हुए दो अलग-अलग दीपक प्रज्वलित कर सकते हैं। इस दौरान संतान की उन्नति, परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति की कामना की जाती है।

प्रदोष काल में जलाएं दो विशेष दीपक

धार्मिक परंपरा के अनुसार, अहोई अष्टमी के दिन प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और माता पार्वती के सामने दो अलग-अलग दीपक जलाएं। इन दीपकों में अलग-अलग प्रकार की बत्ती का इस्तेमाल किया जाता है। पहला दीपक लंबी बत्ती से और दूसरा गोल बत्ती से तैयार किया जाता है। दीपक जलाते समय मन को शांत रखें और श्रद्धापूर्वक अपनी मनोकामना व्यक्त करें।

माता पार्वती के लिए लंबी बत्ती का दीपक

पहला दीपक लंबी बत्ती से जलाकर माता पार्वती को समर्पित करने की परंपरा बताई गई है। माता पार्वती को मातृत्व, शक्ति और सृजन का प्रतीक माना जाता है। इस दीपक को जलाते समय माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की कामना कर सकती हैं। बच्चों की पढ़ाई, करियर और रोजगार से जुड़ी परेशानियों के दूर होने की प्रार्थना भी की जाती है।

भगवान शिव के लिए गोल बत्ती का दीपक

दूसरा दीपक गोल बत्ती से जलाकर भगवान शिव के निमित्त समर्पित किया जाता है। इस दौरान परिवार में सुख-शांति, आपसी प्रेम और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना की जाती है। श्रद्धालु भगवान शिव का स्मरण करते हुए परिवार के सभी सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

दीपदान करते समय रखें इन बातों का ध्यान

पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें। दोनों दीपक श्रद्धापूर्वक जलाएं और अपनी मनोकामना व्यक्त करें। दीपदान के बाद कुछ समय मंदिर में बैठकर शिव मंत्रों का जाप या ध्यान कर सकते हैं। मंदिर में दीपक जलाते समय वहां की व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।

तीन विशेष कामनाओं के लिए करें प्रार्थना

अहोई अष्टमी पर शिव-शक्ति की आराधना करते समय संतान की शिक्षा, करियर और रोजगार में सफलता की कामना की जा सकती है। परिवार में किसी सदस्य के स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर उसके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। वहीं, आर्थिक तंगी या कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहे परिवार सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता के लिए भगवान से प्रार्थना कर सकते हैं।

अहोई अष्टमी का यह पर्व मातृत्व, संतान के प्रति प्रेम और परिवार के कल्याण की भावना से जुड़ा है। पूजा और दीपदान को श्रद्धा तथा धार्मिक आस्था के साथ किया जाता है।