57 हजार शिक्षक भर्ती का वादा रद्दी की टोकरी में, शिक्षा व्यवस्था बदहाल: विक्की मिश्रा

दुर्ग जनपद पंचायत के पूर्व सभापति विक्की मिश्रा ने राज्य सरकार पर शिक्षक भर्ती के वादे को पूरा नहीं करने और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने शिक्षक भर्ती, स्कूलों में शिक्षकों की कमी, युक्तियुक्तकरण, स्वामी आत्मानंद स्कूलों और टीईटी से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

Sep 24, 2026 - 16:58
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57 हजार शिक्षक भर्ती का वादा रद्दी की टोकरी में, शिक्षा व्यवस्था बदहाल: विक्की मिश्रा

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l दुर्ग जनपद पंचायत के पूर्व सभापति विक्की मिश्रा ने राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव के दौरान 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था, लेकिन यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। उनके अनुसार, तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने पहली कैबिनेट में 33 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी, लेकिन लगभग तीन वर्ष का समय बीतने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

विक्की मिश्रा ने कहा कि शिक्षक भर्ती नहीं होने का असर प्रदेश के सरकारी स्कूलों पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, शिक्षकों की कमी के कारण हजारों स्कूल एकल शिक्षकीय हो गए हैं, जबकि सैकड़ों स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती में देरी से बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है और सरकार ने चुनाव के दौरान किए गए वादे को पूरा नहीं किया है।

उन्होंने युक्तियुक्तकरण योजना को लेकर भी सवाल उठाए। मिश्रा का कहना है कि युक्तियुक्तकरण के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का सेटअप प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान स्वामी आत्मानंद स्कूलों को बेहतर परिणाम और सुविधाएं मिल रही थीं, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इन स्कूलों की सुविधाओं में कटौती की जा रही है।

विक्की मिश्रा ने बीएड और डीएड की योग्यता हासिल कर सेवा दे रहे शिक्षकों से जुड़े टीईटी के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि टीईटी के नाम पर कार्यरत शिक्षकों को परेशान किया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में तनाव की स्थिति बन रही है और इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।

मिश्रा ने सरकार पर निजी संस्थाओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर होने का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा। उन्होंने राज्य सरकार से शिक्षक भर्ती के वादे को पूरा करने और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की।