RTI में 77,402 मीट्रिक टन अमानक चावल खारिज होने का खुलासा, FCI और मार्कफेड की जवाबदेही पर उठे सवाल
छत्तीसगढ़ में कस्टम मिल्ड राइस की गुणवत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। अधिवक्ता और RTI कार्यकर्ता मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार, FCI रायपुर मंडल से मिले जवाब में 1 जनवरी 2023 से अब तक 77,402.25 मीट्रिक टन चावल अमानक बताकर खारिज किए जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने रिकवरी, बैंक गारंटी, FIR और विजिलेंस जांच को लेकर सवाल उठाते हुए CVC और EOW/ACB में शिकायत तथा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की बात कही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में धान की कस्टम मिलिंग और चावल की गुणवत्ता को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। RTI कार्यकर्ता, अधिवक्ता एवं राजनेता मनोज सिंह ठाकुर ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के रायपुर मंडल से प्राप्त जानकारी के आधार पर अमानक चावल की बड़ी मात्रा को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, FCI के 28 अक्टूबर 2026 के जवाब में 1 जनवरी 2023 से अब तक रायपुर मंडल में 77,402.25 मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (CMR) को अमानक बताकर खारिज किए जाने की जानकारी दी गई है। उन्होंने इस मामले में चावल की रिकवरी, जिम्मेदार मिलरों पर कार्रवाई और सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही स्पष्ट करने की मांग की है।
77,402 मीट्रिक टन चावल खारिज होने पर सवाल
मनोज सिंह ठाकुर का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में चावल अमानक घोषित होने के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित मिलरों से मानक चावल की कितनी मात्रा वापस जमा कराई गई और आगे क्या कार्रवाई हुई। उनके मुताबिक, RTI के जवाब में रिकवरी का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। उन्होंने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई है। हालांकि, उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में संबंधित दस्तावेजों का पूरा विवरण और विभागों की ओर से इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण शामिल नहीं है।
FIR, बैंक गारंटी और विजिलेंस जांच की मांग
मनोज सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया है कि अमानक चावल के मामले में संबंधित मिलरों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई, बैंक गारंटी जब्त करने और उच्चस्तरीय जांच जैसे कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता और आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की आवश्यकता का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, FCI ने कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्य एजेंसी मार्कफेड पर होने की बात कही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि RTI से मिले जवाब में केंद्रीय सतर्कता दल द्वारा जांच या निरीक्षण नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है।
किसानों और धान उपार्जन व्यवस्था पर असर की आशंका
ठाकुर ने आशंका जताई कि चावल की गुणवत्ता संबंधी समस्याओं और गोदामों में भंडारण की स्थिति का असर धान उठाव तथा सरकारी उपार्जन व्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अमानक चावल घोषित होने के पीछे क्या कारण रहे, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और सरकारी नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
CVC, EOW और हाईकोर्ट जाने की तैयारी
मनोज सिंह ठाकुर ने कहा है कि यदि संबंधित एजेंसियों की ओर से मामले में विस्तृत जांच और आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती, तो वह केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW/ACB) में दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराएंगे। उन्होंने पूरे मामले की जांच CBI या उच्चस्तरीय समिति से कराने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की भी बात कही है।
यह मामला फिलहाल मनोज सिंह ठाकुर द्वारा RTI से प्राप्त जानकारी के आधार पर उठाए गए सवालों और आरोपों पर आधारित है। अमानक चावल की असल वजह, रिकवरी की स्थिति और संबंधित अधिकारियों या एजेंसियों की जवाबदेही का अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच तथा आधिकारिक रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।