रायपुर में ₹2.96 करोड़ के डामरीकरण पर सवाल, मनोज सिंह ठाकुर ने पहले ड्रेनेज ऑडिट और सड़क चौड़ीकरण की उठाई मांग
रायपुर के कुशालपुर–प्रोफेसर कॉलोनी मार्ग पर करीब 2.96 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे डामरीकरण को लेकर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पहले हुए ड्रेनेज कार्य में कथित अनियमितताओं का हवाला देते हुए RTI से मिले दस्तावेजों के आधार पर जांच की मांग की है। ठाकुर का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने और जलनिकासी की व्यवस्था किए बिना डामरीकरण कराना समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने ड्रेनेज ऑडिट, EOW जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर के कुशालपुर–प्रोफेसर कॉलोनी मार्ग पर करीब 2 करोड़ 96 लाख रुपये की लागत से कराए जा रहे डामरीकरण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ता एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के पूर्व सदस्य मनोज सिंह ठाकुर ने इस कार्य की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि सड़क पर डामर बिछाने से पहले क्षेत्र की ड्रेनेज व्यवस्था का ऑडिट कराया जाए और सड़क का आवश्यक चौड़ीकरण किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पहले कराए गए ड्रेनेज कार्य में कथित अनियमितताओं की जांच किए बिना नया डामरीकरण कराना जनता के पैसे के उचित उपयोग पर सवाल खड़े करता है।
मनोज सिंह ठाकुर के मुताबिक, वामनराव लाखे वार्ड क्रमांक 66 के अंतर्गत कुशालपुर–प्रोफेसर कॉलोनी मार्ग पर 296.85 लाख रुपये की लागत से डामरीकरण कराया जा रहा है। इस कार्य के भूमिपूजन में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी और महापौर मीनल चौबे की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों से सवाल किया कि क्षेत्र में लंबे समय से बनी जलभराव और यातायात जाम की समस्याओं का समाधान किए बिना डामरीकरण कराने का औचित्य क्या है।
ठाकुर ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से सूचना के अधिकार यानी RTI के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत वर्ष 2021-22 में कुशालपुर, संतोषी नगर और सुंदर नगर क्षेत्र में ड्रेनेज परियोजना का काम कराया गया था। उनका दावा है कि निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी कार्य अधूरा रहा, इसके बावजूद संबंधित ठेकेदारों पर शून्य पेनाल्टी लगाई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बिना थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट और भौतिक सत्यापन के परियोजना में 100 प्रतिशत राशि खर्च होने का विवरण कैसे दर्ज किया गया। इन दावों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी उन्होंने की है।
मनोज सिंह ठाकुर का कहना है कि कुशालपुर, संतोषी नगर और प्रोफेसर कॉलोनी के कई हिस्सों में बारिश के दौरान नालियों का गंदा पानी सड़कों और घरों तक पहुंचने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल सड़क पर डामर बिछाने से जलनिकासी की समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने गोपिया पारा से मां दंतेश्वरी मंदिर, संतोषी चौक, तिरंगा चौक होते हुए रिंग रोड तक के मार्ग का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सड़क पर यातायात का दबाव अधिक है और कई स्थानों पर सड़क संकरी होने के कारण जाम की स्थिति बनती है। इससे स्कूली बच्चों, एंबुलेंस और आम नागरिकों को परेशानी होती है।
उन्होंने मांग की है कि कुशालपुर-संतोषी नगर ड्रेनेज परियोजना का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए और कथित वित्तीय अनियमितताओं तथा शून्य पेनाल्टी के मामले की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा यानी EOW से जांच कराई जाए। साथ ही मास्टर प्लान के अनुसार अतिक्रमण हटाकर सड़क चौड़ीकरण किया जाए और भूमिगत जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही डामरीकरण कराया जाए। उनका कहना है कि परियोजना से जुड़े अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
मनोज सिंह ठाकुर ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का समाधान किए बिना डामरीकरण कराया गया और उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे क्षेत्रवासियों के साथ आंदोलन करेंगे। उन्होंने मामले को विधिक मंच तक ले जाने की भी बात कही है। फिलहाल उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों पर संबंधित स्मार्ट सिटी प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों का पक्ष सामने आना बाकी है।