पिथौरा रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर धोखाधड़ी के आरोप, 10 लाख रुपये के लेन-देन पर उठे सवाल
महासमुंद जिले के पिथौरा रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री को लेकर गंभीर अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के अनुसार, जमीन की कीमत, खसरा नंबर, मृत महिला की पहचान और भुगतान संबंधी दस्तावेजों में विसंगतियां हैं। मामले में रजिस्ट्री प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग उठ सकती है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद। जिले के पिथौरा स्थित रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन के पंजीयन को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। UNA की शिखा दास द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि जमीन की रजिस्ट्री के दौरान मृत महिला की पहचान, जमीन की वास्तविक स्थिति, खसरा नंबर और भुगतान संबंधी दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां रही हैं। रिपोर्ट में करीब 10 लाख रुपये की जमीन के सौदे को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।
मृत महिला की पहचान को लेकर सवाल
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि करीब 20 वर्ष पहले मृत हो चुकी महिला को दस्तावेजों में जीवित दिखाकर उसकी पहचान सौतेली महिला के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस कथित विसंगति को रजिस्ट्री प्रक्रिया की गंभीर खामी बताया गया है। यदि दस्तावेजों में मृत व्यक्ति की पहचान या स्थिति गलत तरीके से दर्ज की गई है, तो इसकी जांच संबंधित अभिलेखों और प्रमाणपत्रों के आधार पर की जानी आवश्यक होगी।
जमीन की कीमत और दूरी पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, जमीन की कीमत को लेकर भी संदेह जताया गया है। आरोप है कि लगभग 10 लाख रुपये मूल्य की बताई जा रही जमीन का पंजीयन महज 58 हजार रुपये में किया गया। इसके साथ ही पक्की सड़क से लगी जमीन को दस्तावेजों में लगभग आधा किलोमीटर दूर दर्शाए जाने का दावा किया गया है। इन तथ्यों की वास्तविकता का निर्धारण जमीन के दस्तावेजों, स्थल निरीक्षण और संबंधित मूल्यांकन अभिलेखों के परीक्षण से ही हो सकता है।
खसरा नंबर और भुगतान संबंधी दस्तावेजों पर आपत्ति
रिपोर्ट में खसरा नंबर 115 को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि बी-1, खसरा और नक्शे में दर्ज खसरा नंबर 115 को खसरा नंबर 114 का हिस्सा बताया गया। यदि राजस्व अभिलेखों और रजिस्ट्री दस्तावेजों में अंतर है, तो संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी होगा।
इसके अलावा, भुगतान के विवरण में बैंक खाता संख्या के बजाय केवल चेक नंबर का उल्लेख होने पर भी आपत्ति जताई गई है। रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि भुगतान का पूरा विवरण और वास्तविक लेन-देन किस प्रकार सत्यापित किया गया। इन बिंदुओं की जांच बैंक रिकॉर्ड, चेक संबंधी विवरण और पंजीयन दस्तावेजों से की जा सकती है।
जांच से स्पष्ट हो सकती है वास्तविक स्थिति
रिपोर्ट में रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान कथित कमीशन लेन-देन को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका की पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं होती। मामले में संबंधित दस्तावेजों की जांच, राजस्व अभिलेखों का मिलान और संबंधित पक्षों का बयान महत्वपूर्ण होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रजिस्ट्री में वास्तव में अनियमितता हुई है या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।