मोवा भट्ठी समेत अन्य अहातों में प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री का आरोप, कार्रवाई की मांग
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रदेश मीडिया प्रभारी अफरोज ख्वाजा ने मोवा भट्ठी सहित अन्य भट्ठियों के अहातों में प्रतिबंधित और अमानक वस्तुओं की खुलेआम बिक्री का मुद्दा उठाया है। उनका आरोप है कि शासन-प्रशासन के अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते डिस्पोजल गिलास, पानी पाउच समेत बिक्री पर प्रतिबंधित वस्तुएं खुलेआम उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिकायत और मीडिया के माध्यम से जानकारी सामने आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l मोवा भट्ठी समेत अन्य भट्ठियों के अहातों में अमानक और बिक्री पर प्रतिबंधित वस्तुओं की खुलेआम बिक्री को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रदेश मीडिया प्रभारी अफरोज ख्वाजा द्वारा इस मुद्दे को लगातार उठाए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि शासन के अधीन संचालित संबंधित अहातों में प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
अफरोज ख्वाजा का आरोप है कि मोवा भट्ठी और अन्य भट्ठियों के अहातों में डिस्पोजल गिलास, पानी पाउच और अन्य बिक्री पर प्रतिबंधित वस्तुएं खुलेआम रखकर बेची जा रही हैं। उनके अनुसार, इन वस्तुओं की बिक्री को लेकर लगातार जानकारी और शिकायतें सामने आने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है।
इस मामले को लेकर उन्होंने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण प्रतिबंधित अथवा अमानक वस्तुओं की बिक्री जारी है। हालांकि, अधिकारियों की मिलीभगत के इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
अफरोज ख्वाजा के मुताबिक, इस मामले की जानकारी संबंधित स्तर पर दी जा चुकी है और शिकायत के माध्यम से भी मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा प्रेस और मीडिया के माध्यम से भी लगातार इस विषय को सामने लाया जा रहा है। इसके बावजूद यदि प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री जारी है, तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
मामले को लेकर मांग की जा रही है कि भट्ठियों और उनके अहातों में उपलब्ध कराई जा रही वस्तुओं की जांच की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि किन वस्तुओं की बिक्री की अनुमति है और किन वस्तुओं पर प्रतिबंध लागू है। यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई गई है।
इस पूरे मामले में अब प्रशासन की ओर से जांच या कार्रवाई को लेकर किसी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि लगातार शिकायतों और मीडिया में मामला सामने आने के बाद भी यदि स्थिति बनी रहती है, तो संबंधित विभागों को इस पर गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए।