मोहला-मानपुर में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, डीईओ के अवकाश के बाद राजनांदगांव के अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार

मोहला-मानपुर जिले में जिला शिक्षा अधिकारी के अवकाश पर जाने के बाद राजनांदगांव के डीईओ प्रवास बघेल को अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इस व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक निगरानी, अधिकारियों की उपलब्धता और आदेश जारी करने के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, कार्यालय में कर्मचारियों की कमी, भवनविहीन शालाओं और शिक्षकों की अनुपलब्धता जैसी समस्याओं के समाधान की आवश्यकता भी सामने आई है।

Oct 22, 2026 - 13:16
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मोहला-मानपुर में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, डीईओ के अवकाश के बाद राजनांदगांव के अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख, मानपुर l जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी के अवकाश पर जाने के बाद राजनांदगांव के जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास बघेल को मोहला-मानपुर जिले का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहा है कि दूसरे जिले में पदस्थ अधिकारी अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ मोहला-मानपुर की शिक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी किस प्रकार करेंगे। स्थानीय स्तर पर कार्यालयीन संसाधनों की कमी, विद्यालयों में भवनों की अनुपलब्धता और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याओं के बीच विभागीय कामकाज को सुचारु बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

डीईओ के अवकाश और अतिरिक्त प्रभार को लेकर सवाल

जिला शिक्षा अधिकारी के अवकाश पर जाने के बाद विभागीय कार्यों के संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। अवकाश के कारणों को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चर्चाएं सामने आई हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। ऐसे में विभागीय कामकाज की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस दौरान स्कूलों का नियमित निरीक्षण, शिक्षकों की समस्याओं का निराकरण, विभागीय योजनाओं की समीक्षा और प्रशासनिक कार्यों का संचालन किस तरह किया जाता है।

अतिरिक्त प्रभार के आदेश पर स्पष्टता की जरूरत

अतिरिक्त प्रभार सौंपने के लिए जारी आदेश की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारी के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि यह आदेश संयुक्त संचालक स्तर से जारी किया गया है। ऐसे में आदेश जारी करने के लिए लागू नियमों, सक्षम प्राधिकारी और राज्य शासन अथवा लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। संबंधित आदेश और उसके आधार में लागू नियमों की जानकारी सार्वजनिक होने से प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हालांकि, आदेश की वैधता के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित नियमों का परीक्षण आवश्यक है।

50 किलोमीटर दूर से कैसे होगी निगरानी?

नए जिले के गठन का उद्देश्य प्रशासनिक सुविधाओं को आम नागरिकों के करीब पहुंचाना और स्थानीय समस्याओं का शीघ्र समाधान करना होता है। ऐसे में दूसरे जिले में पदस्थ अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से उनकी नियमित उपलब्धता और स्थानीय स्तर पर निगरानी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि अतिरिक्त प्रभार संभालने वाले अधिकारी मोहला-मानपुर कार्यालय में कितने समय उपलब्ध रहेंगे, विद्यालयों के निरीक्षण की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी और शिक्षकों तथा प्रधानपाठकों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए क्या व्यवस्था बनाई गई है।

स्कूलों में भवन और शिक्षकों की कमी बड़ी चुनौती

जिले की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण चिंता विद्यालयों की बुनियादी स्थिति है। स्थानीय स्तर पर भवनविहीन शालाओं, शिक्षकों की कमी और शिक्षा विभाग के कार्यालय में पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। बच्चों को सुरक्षित भवन, पर्याप्त शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए विद्यालयवार समस्याओं का आकलन, रिक्त पदों की जानकारी और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की कार्ययोजना आवश्यक है।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना जरूरी

मोहला-मानपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को प्रशासनिक व्यवस्था के साथ जमीनी समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा। अतिरिक्त प्रभार के दौरान अधिकारियों की नियमित उपलब्धता, स्कूलों के निरीक्षण, कर्मचारियों की कमी और भवनविहीन विद्यालयों की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। साथ ही, शिक्षकों की कमी दूर करने और विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।

अब निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर हैं। अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था किस प्रकार संचालित होगी और स्कूलों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। जिले के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक जवाबदेही, पर्याप्त संसाधन और नियमित निगरानी महत्वपूर्ण साबित होंगे।