42 वर्षीय रेखा कैवर्त गौरेला विकासखंड के ग्राम सारबहरा की रहने वाली हैं। वे गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार से हैं और छोटे स्तर पर टेलरिंग का काम करती हैं। इसी काम से होने वाली आय के माध्यम से वे परिवार की जिम्मेदारियां संभालती हैं। उनके परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है और सभी बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई और सिलाई के सामान में मदद
रेखा के सामने बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च और टेलरिंग के काम के लिए आवश्यक सामग्री जुटाने की जिम्मेदारी है। पहले सीमित आय में इन सभी जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। बच्चों की ट्यूशन फीस के साथ सिलाई के काम के लिए फाल-अस्तर जैसी सामग्री खरीदने के लिए भी अलग से राशि की जरूरत होती थी।
रेखा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से इन खर्चों को संभालने में उन्हें मदद मिल रही है। उनके अनुसार, हर महीने खाते में एक हजार रुपये आने से घरेलू बजट को व्यवस्थित करने में सहूलियत होती है।
आर्थिक सहायता से बढ़ा आत्मविश्वास
रेखा के अनुसार, योजना की राशि मिलने से उन्हें अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए पूरी तरह परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। खाते में सीधे राशि आने से वे बच्चों की पढ़ाई और अपने टेलरिंग के काम से जुड़ी आवश्यकताओं पर इसका उपयोग कर पाती हैं।
उन्होंने बताया कि पहले घरेलू खर्च और बच्चों की जरूरतों को लेकर अक्सर चिंता बनी रहती थी। अब नियमित आर्थिक सहायता मिलने से कुछ जरूरी खर्चों की व्यवस्था आसानी से हो जाती है।
टेलरिंग के काम को आगे बढ़ाने का प्रयास
परिवार की जिम्मेदारियों के साथ रेखा अपनी टेलरिंग की छोटी दुकान भी चला रही हैं। सिलाई के काम के लिए आवश्यक सामग्री खरीदने में मिलने वाली आर्थिक सहायता का उपयोग करने से उन्हें अपना काम जारी रखने में मदद मिल रही है।
रेखा का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ वे अपने टेलरिंग के काम को भी आगे बढ़ाना चाहती हैं। नियमित सहायता से उन्हें परिवार और आजीविका दोनों को संभालने में सुविधा मिल रही है।
राज्य शासन के प्रति जताया आभार
रेखा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए महतारी वंदन योजना के लिए राज्य शासन को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग वे बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आवश्यकताओं में कर रही हैं।
रेखा का अनुभव बताता है कि सीमित आय वाले परिवारों में बच्चों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और आजीविका से जुड़े खर्चों को एक साथ संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनके अनुसार, नियमित आर्थिक सहायता से इन खर्चों के प्रबंधन में उन्हें राहत और आत्मविश्वास मिला है।