21 क्विंटल धान खरीदी पर साय सरकार को घेरा, डॉ. लक्ष्मी ध्रुव बोलीं—धान का समर्थन मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल करे सरकार
सिहावा की पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने साय कैबिनेट के धान खरीदी संबंधी निर्णय को किसान विरोधी और निराशाजनक बताया है। उन्होंने सरकार से धान का समर्थन मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। साथ ही एग्रीस्टैक पंजीयन की अनिवार्यता और डिजिटल क्रॉप सर्वे में कथित विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए किसानों को धान बेचने में परेशानी होने की आशंका जताई।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और समर्थन मूल्य को लेकर सियासत तेज हो गई है। सिहावा की पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने 27 अक्टूबर को साय कैबिनेट की बैठक में लिए गए धान खरीदी संबंधी निर्णय को किसान विरोधी और निराशाजनक बताया है। उन्होंने राज्य सरकार से धान का समर्थन मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार किसानों को उनके हक के अनुरूप लाभ देने के बजाय पुराने मूल्य पर खरीदी की घोषणा कर वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है।
डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने कहा कि सरकार 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी और 15 नवंबर से खरीदी शुरू करने की बात कर रही है, लेकिन किसानों को मिलने वाले मूल्य को लेकर उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं। उनके अनुसार, पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार की ओर से धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी में लगभग 380 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। इस वृद्धि को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को किसानों को कम से कम 3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस वर्ष भी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदी का निर्णय लेकर किसानों को निराश किया है।
पूर्व विधायक ने एग्रीस्टैक पंजीयन को अनिवार्य किए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिन किसानों का पिछले वर्ष पंजीयन नहीं हो पाया या किसी कारणवश जिनका पंजीयन अधूरा रह गया, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। ऐसे में संबंधित किसानों को धान बेचने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पंजीयन से वंचित किसानों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे वे अपनी उपज बेचने के अधिकार से वंचित न हों।
डॉ. ध्रुव ने डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से रकबे के ऑनलाइन निर्धारण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि सर्वे में खसरा और रकबे से संबंधित विसंगतियां सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, यदि किसानों के रिकॉर्ड में दर्ज भूमि का क्षेत्रफल गलत है, तो खरीदी केंद्रों में धान बेचने के समय समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। त्रुटियों को सुधारने में देरी होने पर किसानों को निर्धारित समय के भीतर अपनी उपज बेचने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इन विसंगतियों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के बीच विवाद की स्थिति भी बन सकती है।
पूर्व विधायक ने कहा कि सरकार नए धान खरीदी केंद्र खोलने, खरीदी व्यवस्था बढ़ाने और बायोमेट्रिक सत्यापन की बात कर रही है, लेकिन व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों का पंजीयन और रकबे का रिकॉर्ड सही हो। यदि किसान के दस्तावेजों और ऑनलाइन रिकॉर्ड में अंतर होगा, तो खरीदी केंद्रों तक पहुंचने के बाद भी उसे परेशानी हो सकती है।
डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने राज्य सरकार से धान का समर्थन मूल्य 3500 रुपये प्रति क्विंटल करने, एग्रीस्टैक पंजीयन से वंचित किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने और डिजिटल क्रॉप सर्वे की विसंगतियों को समय रहते दूर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को राहत देने के लिए केवल खरीदी की मात्रा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उचित मूल्य और सरल प्रक्रिया सुनिश्चित करना भी जरूरी है।