बच्चों की पढ़ाई राजनीति का मंच नहीं, उनका भविष्य है: खिलावन बघेल ने स्कूलों में राजनीतिक आयोजनों पर उठाए सवाल

महासमुंद शहर कांग्रेस कमेटी के मंडल अध्यक्ष और पूर्व बोर्ड उपाध्यक्ष खिलावन बघेल ने स्कूलों में विद्यार्थियों को राजनीतिक एवं सरकारी आयोजनों में शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों का शिक्षण समय प्रभावित नहीं होना चाहिए और उन्हें राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन का हिस्सा बनाने के बजाय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्कूलों में रात के आयोजनों, धूप में रंगोली बनवाने और लंबित निःशुल्क किताबों के वितरण की भी जांच की मांग की।

Oct 8, 2026 - 15:32
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बच्चों की पढ़ाई राजनीति का मंच नहीं, उनका भविष्य है: खिलावन बघेल ने स्कूलों में राजनीतिक आयोजनों पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l महासमुंद शहर कांग्रेस कमेटी के मंडल अध्यक्ष और पूर्व बोर्ड उपाध्यक्ष खिलावन बघेल ने छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों की भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल बच्चों के भविष्य की नींव रखने वाले संस्थान हैं और यहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनके शिक्षण समय की रक्षा करना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होनी चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को बार-बार राजनीतिक या सरकारी आयोजनों में शामिल किए जाने से यदि उनकी नियमित कक्षाएं प्रभावित होती हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ सकता है।

खिलावन बघेल ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या सरकार का आयोजन बच्चों की शिक्षा से अधिक महत्वपूर्ण नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को राजनीतिक शक्ति-प्रदर्शन का हिस्सा बनाने के बजाय उन्हें पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल गतिविधियों, विज्ञान प्रयोग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और आधुनिक कौशल से जोड़ने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सहभागिता का स्पष्ट शैक्षणिक उद्देश्य है और उससे उनकी सुरक्षा, गरिमा तथा नियमित पढ़ाई प्रभावित नहीं होती, तो ऐसे आयोजन को उचित माना जा सकता है। लेकिन केवल भीड़ बढ़ाने या मंच की शोभा बढ़ाने के लिए बच्चों को कक्षाओं से बाहर करना उचित नहीं है।

बघेल ने स्कूलों में रात के समय विद्यार्थियों को बुलाए जाने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि रात में किसी कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को बुलाया जाता है और इस दौरान किसी विद्यार्थी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, इस पर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने दिनभर तेज धूप में स्कूली विद्यार्थियों से बड़ी-बड़ी रंगोलियां बनवाने को लेकर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बच्चों का उपयोग राजनीतिक चेहरा चमकाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पालकों और शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है और उन्हें बच्चों के हित में अपनी बात सामने रखनी चाहिए।

उन्होंने छत्तीसगढ़ में बच्चों से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों का भी उल्लेख किया। बघेल ने कहा कि छात्र-छात्राओं के साथ चाकूबाजी और एसिड अटैक जैसी घटनाओं की खबरें सामने आती रही हैं। साथ ही नाबालिगों में नशे की समस्या और हथियार लेकर घूमने जैसी चिंताओं पर भी शासन-प्रशासन को गंभीरता से काम करना चाहिए। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए तथा विद्यार्थियों को स्कूलों में पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।

खिलावन बघेल ने संविधान के अनुच्छेद 21A, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और गरिमा से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार और प्रशासन से सवाल किया कि क्या विद्यार्थियों को राजनीतिक आयोजनों में बुलाने से पहले उनकी पढ़ाई पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाता है और बाधित हुए शिक्षण समय की भरपाई कैसे की जाती है।

इसके साथ ही उन्होंने सरकारी स्कूलों में वितरित होने वाली निःशुल्क किताबों को लेकर भी जांच की मांग की। उनका कहना है कि कुछ स्कूलों में अब तक किताबें नहीं पहुंची हैं तो इसकी जांच कर तत्काल वितरण की व्यवस्था की जानी चाहिए। बघेल ने मांग की कि स्कूलों को राजनीति का मंच बनाने के बजाय शिक्षा का केंद्र बनाया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को मंच नहीं, पुस्तक; नारे नहीं, शिक्षा और भीड़ नहीं, बेहतर भविष्य चाहिए।