जैन समाज मना रहा दशलक्षण पर्व पर्यूषण, उत्तम आकिंचन्य धर्म की हुई आराधना

छिंदवाड़ा में सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व पर्यूषण के तहत धर्म आराधना का क्रम जारी है। पर्व के नौवें दिन श्रावकगणों ने उत्तम आकिंचन्य धर्म की पूजा-विधान में हिस्सा लिया। विभिन्न जिनालयों और चैत्यालयों में धार्मिक आयोजनों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

Sep 24, 2026 - 17:56
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जैन समाज मना रहा दशलक्षण पर्व पर्यूषण, उत्तम आकिंचन्य धर्म की हुई आराधना

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l मध्य प्रदेश की धर्म नगरी छिंदवाड़ा में सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व पर्यूषण की मंगल आराधना की जा रही है। पर्व के दौरान समाज के श्रावकगण आत्मशुद्धि और धर्म आराधना में जुटे हुए हैं। जिनालयों एवं चैत्यालयों में धार्मिक आयोजनों के चलते वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

पर्वराज दशलक्षण को लेकर सकल दिगंबर जैन समाज के विभिन्न घटकों में उत्साह का माहौल है। समाज के लोग धार्मिक अनुष्ठानों और पूजन-विधान में शामिल होकर धर्म आराधना कर रहे हैं।

सर्वोदय अहिंसा के प्रदेश संयोजक और जिनशासन सेवक दीपक राज जैन ने पर्व की अनुमोदना करते हुए बताया कि पर्वराज के नौवें दिवस भादों सुदी तेरस के शुभ अवसर पर नगर के समस्त दिगंबर जिनालयों सहित चैत्यालयों में बड़ी संख्या में श्रावकगणों ने धर्म के नौवें लक्षण उत्तम आकिंचन्य धर्म की मंगल आराधना की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ पूजन-विधान में हिस्सा लिया।

पर्व के अवसर पर तारण भवन में मंदिर विधि का आयोजन किया गया। इस दौरान सिलवानी से पधारे पंडित अनुभव शास्त्री सहित पाठशाला के बच्चों के मधुर उद्गार सुनने का अवसर श्रद्धालुओं को मिला।

वहीं वीतराग भवन में इंदौर से पधारे डॉक्टर प्रवीण शास्त्री के श्रीमुख से उत्तम आकिंचन्य धर्म के माध्यम से मां जिनवाणी की महिमा के संबंध में जानकारी दी गई।

दशलक्षण महापर्व के दौरान प्रतिदिन धर्म के विभिन्न लक्षणों की आराधना की जा रही है। इसी क्रम में उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना के अवसर पर भी बड़ी संख्या में समाजजनों ने धार्मिक आयोजनों में सहभागिता निभाई। जिनालयों और चैत्यालयों में मंगलगान एवं पूजन-विधान से धर्ममय वातावरण बना रहा।

समाजजनों के अनुसार दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि और धर्म आराधना का महत्वपूर्ण अवसर है। पर्व के दौरान श्रद्धालु धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर आध्यात्मिक साधना और जिनशासन की प्रभावना में योगदान दे रहे हैं।