दुर्ग जिले में जी-राम-जी योजना से 50 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी वितरित, 1,076 निर्माण कार्यों को मंजूरी

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी जी-राम-जी के तहत ग्रामीण रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास को गति मिल रही है। योजना के अंतर्गत अब तक 5,011.25 लाख रुपये यानी लगभग 50.11 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया है। जिले में 1,076 निर्माण कार्य स्वीकृत हुए हैं और दुर्ग, धमधा तथा पाटन जनपद पंचायतों में कुल 10,469 श्रमिक कार्यरत हैं। जल संरक्षण, तालाब गहरीकरण, स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष, आंगनबाड़ी और अन्य ग्रामीण सुविधाओं के निर्माण से रोजगार के साथ गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियां विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

Oct 23, 2026 - 08:55
 0  3
दुर्ग जिले में जी-राम-जी योजना से 50 करोड़ रुपये से अधिक की मजदूरी वितरित, 1,076 निर्माण कार्यों को मंजूरी

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के लिए विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण), यानी जी-राम-जी के तहत विभिन्न कार्यों को गति दी जा रही है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित योजना के अंतर्गत श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना के तहत अब तक 5,011.25 लाख रुपये यानी लगभग 50.11 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान किया जा चुका है। वहीं, जिले में कुल 1,076 निर्माण कार्यों को स्वीकृति मिली है।

तीनों जनपदों में 10,469 श्रमिकों को रोजगार

दुर्ग जिले की दुर्ग, धमधा और पाटन जनपद पंचायतों में वर्तमान में कुल 10,469 श्रमिक योजना के तहत कार्यरत हैं। इनमें धमधा जनपद पंचायत में 5,145, दुर्ग में 3,822 और पाटन में 1,502 श्रमिक शामिल हैं। योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को मजबूत करना है। पात्र ग्रामीण परिवार ग्राम पंचायत के माध्यम से काम की मांग कर सकते हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, योजना में एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी का प्रावधान है और काम की मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

SNA और DBT से खातों में पहुंच रही मजदूरी

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि मजदूरी भुगतान को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए सिंगल नोडल अकाउंट (SNA) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली अपनाई जा रही है। इसके तहत मजदूरी की राशि श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में भेजी जाती है। स्वीकृत कार्यों और भुगतान की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि पात्र श्रमिकों को समय पर उनकी मजदूरी मिल सके।

जनपद पंचायतवार मजदूरी भुगतान के आंकड़ों के अनुसार, पाटन में 1,808.00 लाख रुपये, दुर्ग में 1,634.99 लाख रुपये और धमधा में 1,475.40 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। तीनों जनपदों का कुल भुगतान 4,918.39 लाख रुपये होता है, जो बताए गए जिला स्तरीय कुल भुगतान 5,011.25 लाख रुपये से 92.86 लाख रुपये कम है। इसलिए जनपदवार आंकड़ों और जिला स्तरीय कुल राशि का मिलान किया जाना आवश्यक है।

तालाब, डबरी से लेकर स्कूलों तक होंगे निर्माण कार्य

योजना के अंतर्गत धमधा जनपद पंचायत में 412, पाटन में 315 और दुर्ग में 349 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों में तालाब, डबरी, जल निकासी व्यवस्था, कच्ची नाली, ट्रेंच निर्माण, भूजल संवर्धन और तालाब गहरीकरण जैसे कार्य शामिल हैं। इनसे वर्षा जल संरक्षण, भूजल स्तर सुधारने और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों के अतिरिक्त कक्ष, मुक्तिधाम शेड, आंगनबाड़ी भवन और बालिका शौचालयों के निर्माण जैसे कार्यों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इनसे गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और सामुदायिक सुविधाओं को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।

जी-राम-जी योजना के माध्यम से दुर्ग जिले में रोजगार और विकास को साथ लेकर चलने का प्रयास किया जा रहा है। निर्माण कार्यों से जहां ग्रामीण श्रमिकों को आय का अवसर मिलता है, वहीं जल संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी परिसंपत्तियां गांवों के दीर्घकालिक विकास में उपयोगी साबित हो सकती हैं। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शी भुगतान और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी से ग्रामीण परिवारों को इसका बेहतर लाभ मिल सकेगा।