Crude Oil Price Today: कच्चा तेल 104 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी कीमतें; भोपाल समेत 12 शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा तेल सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं का असर बाजार पर दिखाई दे रहा है। वहीं, दिए गए आंकड़ों के मुताबिक भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं।

Nov 4, 2026 - 12:24
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Crude Oil Price Today: कच्चा तेल 104 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी कीमतें; भोपाल समेत 12 शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट

UNITED NEWS OF ASIA. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को तेजी दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर 104.42 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 96.59 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती कारोबार में गिरावट के बाद दोनों बेंचमार्क में तेजी लौटी।

पहले गिरावट, फिर कच्चे तेल में तेजी

बुधवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट और WTI की कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी। बाजार के निवेशक अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों और मध्य पूर्व में शांति वार्ता की संभावनाओं पर नजर रख रहे थे। हालांकि, बाद में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते तेल की कीमतों में फिर तेजी आ गई। ब्रेंट क्रूड 0.8 प्रतिशत बढ़कर 104.42 डॉलर और WTI 0.5 प्रतिशत चढ़कर 96.59 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया।

अमेरिका-ईरान तनाव से सप्लाई की चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर एयर डिफेंस मिसाइलों को निशाना बनाते हुए सीमित सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे रक्षात्मक कदम बताया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिलहाल ईरान पर नए हमले की तत्काल योजना नहीं होने की बात कही है। दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत अभी किसी समझौते तक नहीं पहुंची है। कतर तनाव कम कराने के लिए मध्यस्थता कर रहा है।

बाजार की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बनी हुई है। यह दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से तेल की सप्लाई प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहे हैं।

अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार घटा

अमेरिका में कच्चे तेल के स्टॉक में बड़ी गिरावट ने भी कीमतों को सहारा दिया। अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के आंकड़ों के अनुसार, 30 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी कच्चे तेल का भंडार 52.7 लाख बैरल घटा। इसके विपरीत, विश्लेषकों ने करीब 8.80 लाख बैरल की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था। इसी अवधि में पेट्रोल का भंडार 14.3 लाख बैरल बढ़ा, जबकि डिस्टिलेट का स्टॉक 11.9 लाख बैरल घटा। ये API के शुरुआती आंकड़े हैं; आधिकारिक सरकारी आंकड़ों का इंतजार था।

भोपाल में पेट्रोल 114 रुपये के पार, 12 शहरों के रेट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद 4 नवंबर को भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ। उपलब्ध शहरवार आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में पेट्रोल 114.36 रुपये और डीजल 99.48 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया। दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों के रेट भी लगभग स्थिर रहे।

शहर

पेट्रोल (₹/लीटर)

डीजल (₹/लीटर)

दिल्ली

102.12

95.20

मुंबई

111.21

97.83

कोलकाता

113.51

99.82

चेन्नई

107.76

99.55

बेंगलुरु

111.68

99.56

हैदराबाद

116.15

104.23

भोपाल

114.36

99.48

जयपुर

113.19

98.25

लखनऊ

101.89

95.36

पटना

113.37

99.36

अहमदाबाद

102.15

98.27

पुणे

111.90

98.55

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर रुपये की विनिमय दर, महंगाई और परिवहन लागत पर भी पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल के अलावा कच्चे तेल का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में भी होता है। इसलिए कीमतों में तेजी का प्रभाव उद्योगों और माल ढुलाई की लागत तक पहुंच सकता है।

क्या तुरंत बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू खुदरा कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव के साथ रुपये और डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत और केंद्र तथा राज्य सरकारों के टैक्स का भी असर पड़ता है। 4 नवंबर को प्रमुख शहरों में कीमतें स्थिर रहने की खबर है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की चाल और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव का घटनाक्रम भारत के ईंधन बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

संपादकीय नोट: शहरवार पेट्रोल-डीजल के आंकड़े प्रकाशित करने से पहले स्थानीय तेल कंपनियों या आधिकारिक फ्यूल-रेट स्रोत से एक बार मिलान कर लें, क्योंकि अलग-अलग वेबसाइटों पर कुछ शहरों के रेट में अंतर दिखाई दे सकता है।