Microsoft Bond Sale: AI और डेटा सेंटर पर खर्च के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने जुटाए 25 अरब डॉलर, 2066 तक चुकाएगी कर्ज

माइक्रोसॉफ्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश के बीच 25 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी किए हैं। कंपनी ने इन्हें 10 अलग-अलग सीरीज में बांटा है, जिनकी मैच्योरिटी 2028 से 2066 तक है। बॉन्ड बिक्री के शुरुआती चरण में निवेशकों की ओर से 100 अरब डॉलर से अधिक के ऑर्डर मिलने की खबर है।

Nov 4, 2026 - 12:29
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Microsoft Bond Sale: AI और डेटा सेंटर पर खर्च के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने जुटाए 25 अरब डॉलर, 2066 तक चुकाएगी कर्ज

UNITED NEWS OF ASIA. दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में शामिल माइक्रोसॉफ्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर से जुड़े बढ़ते निवेश के बीच 25 अरब डॉलर के बॉन्ड जारी किए हैं। कंपनी ने इस बॉन्ड बिक्री के लिए 10 अलग-अलग सीरीज में कीमत तय की है। इन बॉन्ड की मैच्योरिटी अवधि 2028 से लेकर 2066 तक रखी गई है। इसका मतलब है कि कंपनी को सबसे लंबी अवधि वाले बॉन्ड का भुगतान करीब 40 साल बाद करना होगा। माइक्रोसॉफ्ट की यह बॉन्ड बिक्री ऐसे समय हुई है, जब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए भारी पूंजी निवेश कर रही हैं।

माइक्रोसॉफ्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को 25 अरब डॉलर के सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की कीमत तय करने की घोषणा की थी। इन बॉन्ड को दो श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें दो सीरीज फ्लोटिंग रेट और आठ सीरीज फिक्स्ड रेट वाली हैं। फ्लोटिंग रेट बॉन्ड की ब्याज दर सिक्योर्ड ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट यानी SOFR के आधार पर बदलती रहेगी। इनमें 2028 और 2029 में मैच्योर होने वाले एक-एक अरब डॉलर के बॉन्ड शामिल हैं।

वहीं, फिक्स्ड रेट बॉन्ड की ब्याज दर 4.85 प्रतिशत से 6.35 प्रतिशत के बीच रखी गई है। इनमें 2028 में मैच्योर होने वाले दो अरब डॉलर, 2029 और 2031 के लिए 3.25-3.25 अरब डॉलर, 2033 के लिए 2.5 अरब डॉलर और 2036 के लिए चार अरब डॉलर के बॉन्ड शामिल हैं। इसके अलावा 2046 में मैच्योर होने वाले दो अरब डॉलर, 2056 के लिए चार अरब डॉलर और 2066 के लिए दो अरब डॉलर के बॉन्ड भी जारी किए गए हैं। अलग-अलग अवधि और ब्याज दरों के जरिए कंपनी ने लंबे समय के लिए पूंजी जुटाने की व्यवस्था की है।

AI और डेटा सेंटर पर क्यों बढ़ रहा खर्च?

माइक्रोसॉफ्ट दुनिया भर में अपनी क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं और AI तकनीक की क्षमता बढ़ाने में जुटी है। इसके लिए बड़े डेटा सेंटर स्थापित करने, अत्याधुनिक सर्वर, सेमीकंडक्टर चिप और बिजली आपूर्ति जैसी सुविधाओं पर भारी निवेश करना पड़ता है। AI आधारित सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ कंपनियों को अपने तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करना जरूरी हो गया है।

इस तरह के बड़े निवेश के लिए कंपनियां अब केवल अपने पास मौजूद नकदी पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। वे बॉन्ड और कर्ज के जरिए भी फंड जुटा रही हैं, ताकि नकदी का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके। माइक्रोसॉफ्ट की मुख्य वित्तीय अधिकारी एमी हूड ने भी निवेशकों को बताया था कि कंपनी जरूरत और बाजार की अनुकूल परिस्थितियों के अनुसार फंडिंग के दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकती है। इसका उद्देश्य कैश फ्लो और वित्तीय लचीलापन बनाए रखना है।

100 अरब डॉलर से ज्यादा के ऑर्डर मिलने का दावा

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉन्ड बिक्री के शुरुआती चरण में निवेशकों की ओर से 100 अरब डॉलर से अधिक के ऑर्डर मिले थे। यह माइक्रोसॉफ्ट की प्रस्तावित 25 अरब डॉलर की बॉन्ड बिक्री से चार गुना से भी ज्यादा था। हालांकि, यह शुरुआती मांग का आंकड़ा है। इसे कंपनी को मिली अंतिम रकम या वास्तविक निवेश नहीं माना जाना चाहिए।

बॉन्ड से मिले पैसों का कहां होगा इस्तेमाल?

माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, बॉन्ड बिक्री से मिलने वाली शुद्ध रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा। इसमें पूंजीगत खर्च, वर्किंग कैपिटल, शेयरों की दोबारा खरीद, दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण और मौजूदा कर्ज का भुगतान शामिल हो सकता है। कंपनी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा है कि जुटाई गई पूरी 25 अरब डॉलर की रकम केवल AI या डेटा सेंटर पर ही खर्च की जाएगी।

माइक्रोसॉफ्ट की यह बॉन्ड बिक्री दिखाती है कि AI की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में तकनीकी कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना कितना महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर और AI सेवाओं पर निवेश बढ़ने की संभावना है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि इस भारी खर्च से कंपनी की कमाई, क्लाउड कारोबार और मुनाफे में कितनी बढ़ोतरी होती है।