कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, वित्तपोषण, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औद्योगिक विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और आर्थिक विकास में छोटे उद्योगों, कारखानों और कार्यशालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने एमएसएमई के विकास के लिए बेहतर कानून-व्यवस्था, सुगम सड़क संपर्क और त्वरित स्वीकृतियों को जरूरी बताया।
उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति के केंद्र में एमएसएमई हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों के उद्यमियों को भी उद्योग स्थापना और संचालन से संबंधित सेवाएं सरलता और तेजी से उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने औद्योगिक क्षेत्रों में तैयार भूमि और प्लग-एंड-प्ले अधोसंरचना विकसित करने की बात कही। उनके अनुसार इससे छोटी औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन शुरू करने में सुविधा मिल सकती है।
सीआईआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के चेयरमैन एवं बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक बजरंग गोयल ने एमएसएमई को राज्य की औद्योगिक मूल्य-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। वहीं सीआईआई छत्तीसगढ़ एमएसएमई पैनल के संयोजक एवं आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड के निदेशक आदित्य मूंदड़ा ने तकनीक, वित्त और अनुपालन सुधार को एमएसएमई विकास के प्रमुख आधार बताया।
कॉन्क्लेव में “एमएसएमई विकास का वित्तपोषण” विषय पर भी विशेष सत्र आयोजित हुआ। इसमें भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव विनम्र मिश्रा ने एमएसएमई क्षेत्र से जुड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने वर्ष 2020 से अब तक 7.3 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीयन और क्रेडिट गारंटी योजना में एक करोड़ गारंटी का आंकड़ा पार होने की जानकारी दी।
“ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस पर उद्योग दृष्टिकोण” सत्र में उद्योग संचालनालय के संचालक प्रभात मलिक ने सिंगल-विंडो प्रणाली, समयबद्ध स्वीकृतियों और अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। उद्योग प्रतिनिधियों ने स्वीकृतियों, निरीक्षण, भूमि आवंटन और विलंबित भुगतान जैसे व्यावहारिक मुद्दे भी उठाए।
कॉन्क्लेव में एआई एडवांटेज और एसएमई से बड़े कॉर्पोरेट तक की यात्रा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। दूसरे दिन एमएसएमई पेशेवरों के क्षमता निर्माण के लिए टीपीएम और “काइज़ेन विद एआई” जैसे सत्र आयोजित किए जाएंगे।