स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की विभागीय समीक्षा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक दवाइयों, चिकित्सकों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रदेश में छह नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति, डायलिसिस सेवाओं का विस्तार, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था और त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की सघन जांच पर विशेष जोर दिया गया।

Oct 15, 2026 - 09:37
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स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की विभागीय समीक्षा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और आम नागरिकों तक समय पर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 14 अक्टूबर 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता के समय गुणवत्तापूर्ण उपचार, आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों का लगातार विस्तार हो रहा है, लेकिन जहां चिकित्सकों, विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मियों, चिकित्सा उपकरणों और जांच सुविधाओं की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने बढ़ती आबादी और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इसमें प्रत्येक जिले की जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों, उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सा सुविधाओं की जरूरतों का आकलन करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्य जांच और उपचार के लिए मरीजों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव और खराब उपकरणों की समयबद्ध मरम्मत के निर्देश भी दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। वर्तमान में 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को महत्वपूर्ण बताते हुए गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, सुरक्षित संस्थागत प्रसव और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में टीकाकरण, मलेरिया नियंत्रण, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जहां सड़क या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अंतर्गत 375 एम्बुलेंस और 102 महतारी एक्सप्रेस के अंतर्गत 380 वाहन उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने शव वाहन सेवाओं को भी अधिक सहज और समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए, ताकि दुख की घड़ी में परिजनों को परेशानी न हो।

चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और छह निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त छह नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या आठ से बढ़कर 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर सात हो गई है। पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं, जिनके अंतर्गत 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष चिकित्सा सेवाओं और मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने पात्र मरीजों को योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को मिठाइयों, दुग्ध उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की सघन जांच करने तथा मिलावट पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया सहित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य योजनाओं की सफलता तभी मानी जाएगी, जब जरूरतमंद नागरिकों को समय पर और सहज रूप से बेहतर उपचार उपलब्ध हो।