छत्तीसगढ़ में एक साल में दूसरी बार बढ़ा बस किराया, 75% तक वृद्धि पर कांग्रेस ने जताया विरोध
छत्तीसगढ़ में बस किराए में एक साल के भीतर दूसरी बार बढ़ोतरी को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने दावा किया कि साधारण बसों के किराए में 75 प्रतिशत तक की वृद्धि से आम जनता, मजदूरों, किसानों और विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। कांग्रेस ने किराया वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में बस किराए में एक साल के भीतर दूसरी बार की गई बढ़ोतरी को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने किराया वृद्धि को आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि साधारण बसों के किराए में 75 प्रतिशत तक की अप्रत्याशित बढ़ोतरी से आम नागरिकों, मजदूरों, किसानों, विद्यार्थियों और मध्यमवर्गीय परिवारों की परेशानी बढ़ेगी। कांग्रेस का कहना है कि स्लीपर, एसी, सेमी-स्लीपर और लग्जरी बसों का सफर भी महंगा होने से यात्रियों के मासिक बजट पर असर पड़ेगा।
सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार सुशासन और महंगाई कम करने के दावे करती है, लेकिन एक साल के भीतर दूसरी बार बस किराया बढ़ाए जाने से आम और मध्यम वर्ग पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उनके अनुसार, रोजाना कामकाज, इलाज, खरीदारी और अन्य आवश्यकताओं के लिए बसों से यात्रा करने वाले ग्रामीणों को इस वृद्धि का सबसे अधिक सामना करना पड़ेगा। ब्लॉक और जिला मुख्यालय तक आने-जाने वाले लोगों के साथ-साथ कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का परिवहन खर्च भी बढ़ सकता है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि यदि डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीमित है, तो बस किराए में इतनी बड़ी वृद्धि क्यों की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि किराया बढ़ाने के फैसले से बस संचालकों को लाभ मिल सकता है, लेकिन आम यात्रियों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा। कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि यात्रियों को राहत देने के लिए वैकल्पिक उपायों और सब्सिडी पर विचार क्यों नहीं किया गया।
सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों, किसानों, छोटे व्यापारियों और कामकाजी लोगों की आय सीमित होती है। ऐसे में यात्रा खर्च बढ़ने से उनकी बचत प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक लोग रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बाजार तक पहुंचने के लिए सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहते हैं। किराए में वृद्धि उनके लिए नियमित आवाजाही को महंगा बना सकती है।
उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना महामारी और आर्थिक चुनौतियों के दौरान भी आम जनता पर इस तरह का भारी किराया बोझ नहीं डाला गया था। उन्होंने भाजपा सरकार पर जनहित की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को बस संचालकों के हितों के साथ यात्रियों की आर्थिक स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बस किराया वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस ने सवाल किया कि बढ़ती महंगाई के बीच आम नागरिकों को राहत देने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन आम लोगों की बुनियादी जरूरत है और इसे उनकी आर्थिक पहुंच से बाहर नहीं होना चाहिए।