छत्तीसगढ़ की आबकारी नीति पर विकास उपाध्याय ने उठाए सवाल, शराब से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान पर जताई चिंता
पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने छत्तीसगढ़ में शराब के सेवन और उससे जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर राज्य सरकार की आबकारी नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को शराब से मिलने वाले राजस्व के साथ-साथ आम जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। उन्होंने जनजागरूकता अभियान चलाने, नशामुक्ति सेवाओं को मजबूत करने और शराब की लत से जूझ रहे लोगों को उचित उपचार उपलब्ध कराने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में शराब के सेवन और उससे जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने राज्य सरकार की आबकारी नीति पर सवाल उठाए हैं। 24 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि सरकार को शराब से मिलने वाले राजस्व के साथ-साथ आम जनता के स्वास्थ्य की चिंता भी करनी चाहिए। उन्होंने शराब की बिक्री से होने वाली कमाई और उसके सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शराब के ओवररेट और नकली हॉलमार्क को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं और कार्रवाई की खबरें भी आई हैं। उन्होंने नकली शराब से जुड़े मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि शराब की गुणवत्ता में गड़बड़ी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने सरकार से शराब की गुणवत्ता और बिक्री व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि शराब का अत्यधिक सेवन केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर भी असर डाल सकता है। उनके अनुसार, लंबे समय तक अधिक शराब पीने से हड्डियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने, हड्डियों का घनत्व कम होने तथा ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है। उन्होंने इस संदर्भ में वरिष्ठ चिकित्सकों के कथनों का उल्लेख करते हुए शराब सेवन और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
विकास उपाध्याय ने कहा कि कमर या रीढ़ की हड्डी में दर्द और कमजोरी जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कमर या रीढ़ की हर बीमारी का कारण शराब नहीं होता और ऐसी समस्याओं के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है। शराब सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे समय रहते उचित चिकित्सकीय सलाह ले सकें।
उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य और कल्याण की रक्षा करना भी है। यदि शराब के दुष्परिणामों से परिवार प्रभावित हो रहे हैं और लोग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे हैं, तो सरकार को अपनी आबकारी नीति की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि शराब की बिक्री से होने वाली आय का हिसाब रखने वाली सरकार को इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी जनता को देनी चाहिए।
विकास उपाध्याय ने सरकार से मांग की कि शराब के दुष्परिणामों को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही नशामुक्ति सेवाओं को मजबूत करने, शराब की लत से जूझ रहे लोगों को उचित उपचार उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य संबंधी सहायता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि जनता की सेहत की कीमत पर राजस्व कमाने की सोच स्वीकार्य नहीं है। सरकार को शराब से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों पर गंभीरता से काम करना चाहिए और आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।