छह विश्वविद्यालयों में एक साथ शुरू हुआ ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम, बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में पहल

रायपुर में बाल अधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Post Graduate Diploma in Protection of Child Rights (RAKSHAK) पाठ्यक्रम की कक्षाएं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों में एक साथ शुरू की गईं। शुभारंभ कार्यक्रम में छह विश्वविद्यालयों के कुलपति और संबंधित पदाधिकारी ऑनलाइन शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. वर्णिका शर्मा, टंकराम वर्मा और लक्ष्मी राजवाड़े ने विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालयों को शुभकामनाएं दीं। पाठ्यक्रम का उद्देश्य बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ इस क्षेत्र में प्रशिक्षित और संवेदनशील मानव संसाधन तैयार करना है।

Oct 2, 2026 - 10:20
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छह विश्वविद्यालयों में एक साथ शुरू हुआ ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम, बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में पहल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l बाल अधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Post Graduate Diploma in Protection of Child Rights (RAKSHAK) पाठ्यक्रम की कक्षाएं छत्तीसगढ़ के छह विश्वविद्यालयों में एक साथ प्रारंभ की गई हैं। इस पहल के शुभारंभ अवसर पर सभी छह विश्वविद्यालयों के साथ ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालयों के कुलपति और संबंधित पदाधिकारियों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम में डॉ. वर्णिका शर्मा ने सहभागिता की। वहीं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा भी ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए। उन्होंने छह विश्वविद्यालयों में ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम के शुभारंभ पर बधाई दी और बाल अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता तथा इसके महत्व पर अपने विचार रखे।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने भी ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम के शुभारंभ पर सभी छह विश्वविद्यालयों, विद्यार्थियों और संबंधित संस्थानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बाल अधिकारों की रक्षा, बच्चों के सुरक्षित भविष्य और समाज में बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में इस पहल के महत्व को रेखांकित किया।

ऑनलाइन बैठक के दौरान छह विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने बाल अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही। इस पहल को विश्वविद्यालयों के स्तर पर बाल अधिकारों से जुड़े विषयों की समझ विकसित करने और जागरूकता को बढ़ावा देने के प्रयास के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

कार्यक्रम में बच्चों की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। बच्चों ने बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर अपनी जिज्ञासाएं सामने रखीं और सवाल पूछे। आयोग की अध्यक्ष एवं सचिव ने बच्चों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्हें बाल अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। इससे बच्चों को अपने अधिकारों और उनके संरक्षण से जुड़े विषयों को समझने का अवसर मिला।

‘रक्षक’ पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में प्रशिक्षित और संवेदनशील मानव संसाधन तैयार करना भी है। पाठ्यक्रम के माध्यम से बाल अधिकारों की समझ को व्यापक बनाने और बच्चों के संरक्षण से जुड़े संस्थागत प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

‘रक्षक’ पाठ्यक्रम की कक्षाएं पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय, गहीरा गुरु विश्वविद्यालय, एमिटी विश्वविद्यालय, आंजनेय विश्वविद्यालय और शंकराचार्य विश्वविद्यालय में प्रारंभ हुई हैं।

छह विश्वविद्यालयों की सहभागिता से ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम को बाल अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए साझा प्रयास के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। इस पहल के माध्यम से बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षित बचपन और बाल अधिकारों की बेहतर समझ विकसित करने की दिशा में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।