बिजली बिल वसूली के नाम पर 15 हजार लेने का आरोप, रसीद नहीं मिलने से उठे सवाल; JE पर दुकानदार ने लगाए गंभीर आरोप
मैनपुर क्षेत्र में बिजली बकाया वसूली अभियान के दौरान साहू होटल संचालक गुलशन साहू ने प्रभारी JE शेखर चौधरी पर 15 हजार रुपये नगद लेने और कार्रवाई के नाम पर धमकाने का आरोप लगाया है। दुकानदार का दावा है कि राशि देने के तीन दिन बाद भी उसे रसीद नहीं मिली और बिजली आपूर्ति भी बहाल नहीं हुई। दुकानदार ने बातचीत और लेन-देन की ऑडियो रिकॉर्डिंग होने की बात कही है। वहीं छुट्टी पर चल रहे JE एस.के. बंजारे ने लौटने के बाद मामले की जांच करने की बात कही है।
UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l मैनपुर क्षेत्र में बिजली विभाग द्वारा चलाए जा रहे बकाया वसूली अभियान के बीच एक दुकानदार ने विभागीय अधिकारी पर नगद राशि लेने और कार्रवाई के नाम पर धमकाने का गंभीर आरोप लगाया है। नगर के बस स्टैंड स्थित साहू होटल के संचालक गुलशन साहू का दावा है कि बिजली बिल बकाया होने के नाम पर उन्हें जेल भेजने की धमकी दी गई और उनसे 15 हजार रुपये नगद लिए गए। दुकानदार के मुताबिक राशि देने के तीन दिन बाद भी न तो उन्हें कोई रसीद दी गई और न ही उनकी बिजली आपूर्ति बहाल की गई है।
गुलशन साहू के अनुसार वे किराए के कमरे में होटल का संचालन करते हैं। दुकान का बिजली कनेक्शन उपभोक्ता क्रमांक 1001352762 स्वर्गीय प्रकाश साहू के नाम पर दर्ज है। उनके मुताबिक कनेक्शन पर करीब 25,071 रुपये का बकाया बिजली बिल था। आरोप है कि 6 अक्टूबर 2026 को प्रभारी JE शेखर चौधरी अपनी टीम के साथ होटल पहुंचे।
दुकानदार का दावा है कि इस दौरान बिजली चोरी का आरोप लगाते हुए पुलिस केस और जेल भेजने की धमकी दी गई।
दुकानदार के अनुसार कार्रवाई के डर से उन्होंने 15 हजार रुपये नगद शेखर चौधरी को दिए। गुलशन साहू का यह भी दावा है कि अधिकारी के साथ हुई बातचीत और कथित तौर पर राशि के लेन-देन से जुड़ी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। उनका कहना है कि उन्हें कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन राशि देने के बावजूद अब तक न तो भुगतान की रसीद उपलब्ध कराई गई और न ही बिजली कनेक्शन चालू किया गया।
मामले में एक अन्य गंभीर दावा यह भी किया गया है कि वर्तमान JE एस.के. बंजारे छुट्टी पर हैं और विभाग का प्रभार शेखर चौधरी के पास है। दुकानदार का आरोप है कि उनके खिलाफ कार्रवाई से संबंधित पंचनामा और वीडियोग्राफी पहले ही तैयार कर ली गई थी। इसके बाद कथित तौर पर पैसों की मांग की जाती रही और राशि नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस मामले ने बिजली बिल वसूली की प्रक्रिया और नगद राशि लिए जाने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। दुकानदार का कहना है कि यदि 15 हजार रुपये विभागीय बकाया राशि के तौर पर लिए गए थे तो उसकी विधिवत रसीद क्यों नहीं दी गई। वहीं यदि राशि किसी अन्य प्रक्रिया के तहत ली गई थी, तो उसका रिकॉर्ड क्या है, यह भी जांच का विषय है। पूरे मामले में ऑडियो रिकॉर्डिंग और कथित लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वहीं छुट्टी पर चल रहे JE एस.के. बंजारे ने कहा है कि वे फिलहाल अवकाश पर हैं और वापस लौटने के बाद पूरे मामले की गहनता से जांच करेंगे। ऐसे में अब विभागीय स्तर पर होने वाली जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 15 हजार रुपये की राशि किस उद्देश्य से ली गई, उसकी कोई आधिकारिक प्रविष्टि या रसीद है या नहीं और दुकानदार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।