IRDAI ने सितंबर 2026 में बीमा वितरण व्यवस्था के आर्थिक ढांचे में बदलाव को लेकर एक परामर्श पत्र जारी किया है। रिपोर्टों के अनुसार, IRDAI के आंकड़ों में FY23 से FY25 के बीच कॉरपोरेट एजेंटों के माध्यम से नए जीवन बीमा कारोबार में 28 प्रतिशत वृद्धि के मुकाबले वितरक पारिश्रमिक में 125 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सामान्य बीमा के ब्रोकिंग चैनल में इसी अवधि में प्रीमियम 37 प्रतिशत बढ़ा, जबकि ब्रोकर कमीशन में 173 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कांग्रेस के बयान में विशेष रूप से ग्रुप क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस का मुद्दा उठाया गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार IRDAI के प्रस्ताव में सिंगल-प्रीमियम क्रेडिट लाइफ पॉलिसियों पर नए कमीशन की सीमा 2 प्रतिशत तक रखने का प्रस्ताव है। वर्तमान व्यवस्था में सिंगल-प्रीमियम ग्रुप क्रेडिट लाइफ में प्रभावी वितरण भुगतान करीब 45 प्रतिशत तक होने की बात रिपोर्टों में सामने आई है।
सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि ट्रैक्टर, कृषि ऋण, होम लोन और अन्य ऋण लेने वाले ग्राहकों को कई बार लोन के साथ बीमा उत्पाद लेने के लिए दबाव का सामना करना पड़ता है। कांग्रेस ने इसे उपभोक्ता हित से जुड़ा विषय बताते हुए बैंक और बीमा कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, किसी विशेष बैंक या बीमा कंपनी द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने का निष्कर्ष केवल इन आरोपों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता।
IRDAI के प्रस्तावित सुधारों में लोन के साथ बीमा को अनिवार्य रूप से जोड़ने पर रोक लगाने का प्रावधान भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार बैंक या NBFC से जुड़े बीमा वितरण संस्थान किसी ऋण के साथ बीमा को अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ सकेंगे। कुछ परिस्थितियों में बीमा और ऋण को साथ पेश करने की अनुमति होने पर भी ग्राहक को ब्याज दर और बीमा के साथ तथा बिना बीमा के विकल्प की जानकारी देने जैसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
कांग्रेस ने जनरल इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस में बढ़ती लागत तथा कमीशन व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई है। पार्टी ने सरकार से पूछा है कि बीमा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का वास्तविक लाभ पॉलिसीधारकों तक कैसे पहुंचेगा और उच्च वितरण लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर कितना पड़ रहा है।
IRDAI के परामर्श पत्र में प्रस्तावित बदलाव अभी अंतिम नियम नहीं हैं। प्रस्तावों पर हितधारकों से टिप्पणियां मांगी गई हैं और इसके बाद नियामक आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
सुरेंद्र वर्मा ने मांग की कि बीमा क्षेत्र में कमीशन, बैंकश्योरेंस और लोन से जुड़ी बीमा पॉलिसियों की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस का कहना है कि बीमा सुधारों का उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा और उचित मूल्य सुनिश्चित करना होना चाहिए। फिलहाल कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर केंद्र सरकार या संबंधित वित्तीय संस्थानों की प्रतिक्रिया इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।