कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में पिछले दो वर्षों से कई भर्तियां लंबित होने का दावा किया जा रहा है। पार्टी ने सवाल उठाया कि इस अवधि में कितने पदों पर भर्ती पूरी हुई, कितने पद अभी रिक्त हैं और कितनी भर्ती प्रक्रियाएं शुरू होने के बाद भी लंबित हैं। कांग्रेस ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विज्ञापन, पात्रता सूची, आपत्तियों, दस्तावेज सत्यापन, साक्षात्कार, चयन समिति और अंतिम चयन सूची से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला अप्रैल 2023 से विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। विश्वविद्यालय के विभिन्न आधिकारिक दस्तावेजों में भी उनका नाम कुलपति के रूप में दर्ज है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने विशेष रूप से महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान कुलपति के अवकाश को लेकर सवाल उठाया है। कांग्रेस ने कहा है कि यदि अवकाश सामान्य प्रशासनिक या व्यक्तिगत कारणों से लिया गया था, तो संबंधित अवकाश आवेदन, उसकी स्वीकृति और उस अवधि में लिए गए महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पार्टी का कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठ रही आशंकाओं और सवालों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों और युवाओं से जुड़ी सार्वजनिक शैक्षणिक संस्था है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया में सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर और योग्यता के आधार पर चयन का अवसर मिलना चाहिए। पार्टी ने हाल की शैक्षणिक नियुक्तियों में विज्ञापन की शर्तों से लेकर चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता तक स्वतंत्र परीक्षण कराने की मांग की है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने पिछले दो वर्षों में हुई सभी शैक्षणिक भर्तियों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने लंबित भर्तियों की पूरी सूची और उन्हें लंबित रखने के कारण सार्वजनिक करने, चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों एवं पात्रता की जांच करने तथा महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान कुलपति के अवकाश से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग रखी।
कांग्रेस ने कहा है कि जांच के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल ये आरोप प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन या कुलपति की ओर से इन आरोपों पर कोई पक्ष इस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।