छत्तीसगढ़ PSC परीक्षाओं के स्थगन पर दीपक बैज का हमला, भाजपा सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य लोक सेवा आयोग (CGPSC) की सिविल सेवा 2025 के साक्षात्कार और पुलिस एसआई-सूबेदार भर्ती परीक्षा स्थगित होने पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता, मूल्यांकन और अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग को लेकर सवाल उठाए। बैज ने आयोग से उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने, परीक्षाएं स्थगित करने का कारण बताने और नई तारीख घोषित करने की मांग की। उन्होंने सरकारी विभागों में रिक्त पदों का मुद्दा उठाते हुए युवाओं को रोजगार देने के सरकार के वादों पर भी सवाल खड़े किए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के स्थगन को लेकर सियासत तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर दो महत्वपूर्ण परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रियाएं स्थगित की गई हैं।
पहले सिविल सेवा परीक्षा 2025 के साक्षात्कार स्थगित हुए और अब पुलिस सब इंस्पेक्टर (एसआई) एवं सूबेदार भर्ती परीक्षा को दोबारा स्थगित कर दिया गया है। बैज ने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सरकार और आयोग से जवाब मांगा है।
दीपक बैज ने कहा कि पीएससी अपने निर्धारित परीक्षा कैलेंडर का पालन करने में भी सफल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआई भर्ती परीक्षा के परिणाम में अभ्यर्थियों के नामों को लेकर गड़बड़ी सामने आई थी। उनके अनुसार, सिविल सेवा परीक्षा 2025 की मुख्य परीक्षा के बाद साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थियों के चयन में भी सवाल उठे हैं।
बैज ने कहा कि 265 पदों के मुकाबले 1:3 के अनुपात के अनुसार 795 अभ्यर्थियों का चयन होना चाहिए था, लेकिन आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए योग्य माना। उन्होंने शेष 187 अभ्यर्थियों के चयन नहीं होने के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आयोग के अनुसार, संबंधित अभ्यर्थी निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त नहीं कर पाए। हालांकि, उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए मांग की कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे अपने प्राप्तांकों का स्वमूल्यांकन कर सकें और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर संतुष्ट हो सकें। उन्होंने 2024 की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भी कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया और कहा कि आयोग को अपने दावों को पारदर्शी तरीके से प्रमाणित करना चाहिए।
दीपक बैज ने आयोग के अध्यक्ष का पद एक महीने से अधिक समय से खाली होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आयोग के शीर्ष पद पर नियुक्ति नहीं होने से परीक्षाओं के संचालन और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि सीजीपीएससी स्पष्ट करे कि परीक्षाएं और साक्षात्कार स्थगित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, मूल्यांकन एवं शॉर्टलिस्टिंग को लेकर उठे सवालों की स्थिति क्या है और नई तारीखों की घोषणा कब की जाएगी।
उन्होंने शिक्षक भर्ती, कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग में भर्ती प्रक्रिया और विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों का उल्लेख करते हुए सरकार की रोजगार नीति पर भी सवाल उठाए। बैज के अनुसार, प्रदेश में डॉक्टरों, विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों और सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। उन्होंने वन, पुलिस और सहकारिता विभागों में भी रिक्तियों का मुद्दा उठाया तथा आरोप लगाया कि युवाओं को सरकारी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता केवल परीक्षा आयोजित करने से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि प्रत्येक चरण में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। उन्होंने सरकार से युवाओं की आशंकाओं का निराकरण करने और भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा भी अब तक पूरा नहीं हुआ है।
यह बयान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और सरकार की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के हैं। इन आरोपों पर आयोग या राज्य सरकार का पक्ष इस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।