धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि यूपीआई पर शुल्क की चर्चा के बाद कुछ व्यापारियों द्वारा डिजिटल भुगतान के बजाय नगद लेनदेन को प्राथमिकता देने की बात सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि आम लोगों के पास हमेशा पर्याप्त नगदी उपलब्ध नहीं रहती। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, कुछ स्थानों पर यूपीआई शुल्क ग्राहकों से वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि व्यापारियों का तर्क है कि प्रत्येक डिजिटल लेनदेन पर शुल्क देना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ होगा। ठाकुर ने कहा कि पहले सरकार की ओर से यह कहा गया था कि यूपीआई शुल्क का भार जनता पर नहीं बल्कि व्यापारियों पर पड़ेगा, लेकिन कांग्रेस के अनुसार इसका अप्रत्यक्ष असर उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि यूपीआई को देश की डिजिटल क्रांति की पहचान के तौर पर बढ़ावा दिया गया था। उनके अनुसार, यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाया जाता है तो छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर इसका आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार दिनभर में कई डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं और शुल्क लगने की स्थिति में उनके मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को कमाई का जरिया बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देश की जनता पहले से महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव जैसी समस्याओं का सामना कर रही है। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के बजाय लोगों को राहत देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि यूपीआई पर शुल्क लगाए जाने से व्यापारियों के खर्च बढ़ सकते हैं और इसका असर आगे चलकर उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। ठाकुर ने केंद्र सरकार से मांग की कि डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने का फैसला तत्काल वापस लिया जाए और यूपीआई को पहले की तरह निःशुल्क रखा जाए।
यह बयान छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार किया गया है।