कांग्रेस का आरोप- नंदराज पर्वत पर कटाई की अनुमति आदिवासी विरोधी नीति का प्रमाण
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बैलाडीला के नंदराज पर्वत क्षेत्र में खनन और पेड़ कटाई की अनुमति को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस का कहना है कि नंदराज पर्वत बस्तर के आदिवासी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक आस्था का केंद्र है। पार्टी ने दावा किया कि डिपॉजिट-13 क्षेत्र में करीब 7,200 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है। कांग्रेस ने ग्रामसभा की सहमति, वर्ष 2019 में उठे दस्तावेजों की प्रामाणिकता के सवाल और वन एवं पर्यावरणीय अनुमतियों को सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने खनन और पेड़ कटाई की गतिविधियां तत्काल रोककर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बैलाडीला के नंदराज पर्वत क्षेत्र में खनन और पेड़ कटाई की अनुमति को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नंदराज पर्वत केवल लौह अयस्क का भंडार नहीं है, बल्कि बस्तर के आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, संस्कृति और पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है। ऐसे क्षेत्र में खनन और पेड़ कटाई की अनुमति देना सरकार की आदिवासी नीति पर सवाल खड़े करता है।
दीपक बैज ने कहा कि नंदराज पर्वत को बस्तर के आदिवासी समाज में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों को आगे बढ़ाने के बजाय आदिवासी समाज की भावनाओं और ग्रामसभा के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
कांग्रेस ने वर्ष 2019 में नंदराज पर्वत के डिपॉजिट-13 से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार उस समय ग्रामसभा की कथित सहमति और उससे जुड़े दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर सवाल उठे थे। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे और उत्खनन पर रोक लगाने की कार्रवाई की थी।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अब उसी संवेदनशील विषय को दोबारा आगे बढ़ा रही है। कांग्रेस ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि डिपॉजिट-13 क्षेत्र में करीब 7,200 पेड़ों की कटाई की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा खनन के लिए टेंडर और क्षेत्र से लौह अयस्क के नमूने निकाले जाने की बात भी सामने आई है।
कांग्रेस ने सरकार से इन सभी मामलों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने पूछा है कि नंदराज पर्वत पर पेड़ कटाई की अनुमति किस आधार पर दी गई और इसके लिए संबंधित ग्रामसभा की विधिवत बैठक हुई थी या नहीं।
कांग्रेस ने ग्रामसभा की बैठक की वीडियोग्राफी, कार्यवाही और प्रस्ताव की प्रति सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2019 में जिन ग्रामसभा दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर सवाल उठे थे, क्या उनकी नए सिरे से जांच कराई गई है।
दीपक बैज ने पूछा कि करीब 7,200 पेड़ों की कटाई की अनुमति किस अधिकारी ने और किन शर्तों के आधार पर दी। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, पारंपरिक अधिकार और ग्रामसभा की भूमिका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार से नंदराज पर्वत से संबंधित सभी टेंडर, कार्यादेश, वन अनुमति, पर्यावरणीय अनुमति और ग्रामसभा से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि बस्तर जैसे पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्रामसभा और आदिवासी अधिकारों का महत्व सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं अधिक है।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि नंदराज पर्वत से जुड़े पूर्व विवाद में स्थानीय ग्रामीणों ने ग्रामसभा की अनुमति को फर्जी बताया था। पार्टी ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खनन और पेड़ कटाई की अनुमति निर्धारित नियमों और ग्रामसभा की वैध सहमति के आधार पर दी गई है या नहीं।
दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि नंदराज पर्वत पर पेड़ कटाई और खनन से संबंधित सभी गतिविधियों को तत्काल रोका जाए। साथ ही ग्रामसभा की वैधता और सहमति की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था और पारंपरिक अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए।
कांग्रेस ने कहा कि बस्तर की जमीन को केवल खनिज संपदा के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह आदिवासी समाज की जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और आस्था से जुड़ी भूमि है। पार्टी ने कहा कि विकास के नाम पर धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था के केंद्रों को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।