RTI के हवाले से बड़ा दावा: छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा की ₹690 करोड़ से अधिक राशि अनस्पेंट, 2025-26 के UC पर भी सवाल

अधिवक्ता और कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने RTI से प्राप्त जानकारी के आधार पर छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा योजना के तहत बड़ी राशि खर्च नहीं होने का दावा किया है। उनके अनुसार 2023-24 में ₹312.25 करोड़ और 2024-25 में ₹378.52 करोड़ की केंद्रीय हिस्सेदारी अनस्पेंट रही, जो कुल ₹690.77 करोड़ है। उन्होंने 2025-26 के लिए ₹993.40 करोड़ जारी होने और उपयोगिता प्रमाण पत्र केंद्र को प्रस्तुत नहीं किए जाने का भी दावा किया है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में भी यही आंकड़े प्रकाशित हुए हैं।

Oct 3, 2026 - 09:35
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RTI के हवाले से बड़ा दावा: छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा की ₹690 करोड़ से अधिक राशि अनस्पेंट, 2025-26 के UC पर भी सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में समग्र शिक्षा योजना के तहत केंद्र से मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठे हैं। अधिवक्ता और कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर दावा किया है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में समग्र शिक्षा के तहत जारी केंद्रीय हिस्से की बड़ी राशि खर्च नहीं हो सकी। इस दावे को लेकर विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में भी संबंधित आंकड़े प्रकाशित किए गए हैं।

दावे के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार की ओर से ₹776.59 करोड़ जारी किए गए थे। इनमें से ₹312.25 करोड़ की केंद्रीय हिस्सेदारी अनस्पेंट रही। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹830.65 करोड़ जारी किए गए, जिसमें से ₹378.52 करोड़ खर्च नहीं होने की बात कही गई है। दोनों वर्षों की अनस्पेंट राशि को जोड़ने पर यह आंकड़ा ₹690.77 करोड़ होता है।

मनोज सिंह ठाकुर ने वर्ष 2025-26 को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार इस अवधि में केंद्र सरकार की ओर से ₹993.40 करोड़ की राशि जारी की गई, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से केंद्र को उपयोगिता प्रमाण पत्र यानी Utilization Certificate (UC) प्रस्तुत नहीं किया गया। उनका कहना है कि इस स्थिति को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में कई स्कूलों में भवन, शिक्षक और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जरूरत बनी हुई है। ऐसे में केंद्र से उपलब्ध कराई गई राशि का पूरा उपयोग नहीं होने को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब स्कूलों में संसाधनों की आवश्यकता है, तो स्वीकृत राशि का निर्धारित समय में उपयोग क्यों नहीं हो पाया।

उन्होंने 2025-26 के उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि यदि राशि खर्च हुई है तो उसके उपयोग का प्रमाण संबंधित स्तर पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए और यदि राशि खर्च नहीं हुई है तो इसके कारणों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

मनोज सिंह ठाकुर ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने शासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि समग्र शिक्षा योजना के तहत प्राप्त राशि के उपयोग में देरी या शेष राशि रहने के पीछे प्रशासनिक अथवा अन्य कारण क्या रहे।

गौरतलब है कि उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में RTI से जुड़े इन्हीं आंकड़ों के आधार पर ₹690.77 करोड़ की अनस्पेंट राशि का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस रिपोर्ट में उपयोग किए गए मूल RTI पत्र की स्वतंत्र प्रति उपलब्ध नहीं होने के कारण उसके सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी है। इसलिए ₹690.77 करोड़ और 2025-26 के UC से संबंधित बातें मनोज सिंह ठाकुर द्वारा RTI के आधार पर किए गए दावे के रूप में प्रस्तुत की जा रही हैं।