बलरामपुर पंचायत सचिव भर्ती सूची में SC पद शून्य होने का दावा, समाज में नाराजगी

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पंचायत सचिव पदों की भर्ती को लेकर जारी सूची पर अनुसूचित जाति समाज के लोगों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि सूची में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए कोई पद नहीं दर्शाया गया है। जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन की वेबसाइट पर 1 अक्टूबर 2026 को पंचायत सचिव पदों पर भर्ती का विज्ञापन प्रकाशित होने की पुष्टि होती है।

Oct 2, 2026 - 15:01
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बलरामपुर पंचायत सचिव भर्ती सूची में SC पद शून्य होने का दावा, समाज में नाराजगी

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पंचायत सचिव पदों की भर्ती एवं स्थानांतरण सूची को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय लोगों और अनुसूचित जाति समाज के प्रतिनिधियों ने सूची में अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग के लिए पदों की संख्या शून्य दर्शाए जाने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि आरक्षण व्यवस्था के तहत संबंधित वर्ग के लिए पद निर्धारित किए जाने चाहिए थे। हालांकि, इस संबंध में जिला प्रशासन या जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर 1 अक्टूबर 2026 को कार्यालय जिला पंचायत बलरामपुर-रामानुजगंज की ओर से पंचायत सचिव पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। विज्ञापन की आवेदन अवधि 1 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक बताई गई है।

इसी भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी सूची को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। समाज के लोगों और ग्रामीणों का दावा है कि सूची में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए पदों की संख्या ‘शून्य’ दर्शाई गई है। इसके बाद अनुसूचित जाति समुदाय के युवाओं और स्थानीय लोगों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण रोस्टर का पालन किया जाना आवश्यक है। उनका आरोप है कि यदि किसी वर्ग के लिए निर्धारित पद सूची में नहीं हैं, तो इससे भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इस समय SC पदों की संख्या शून्य होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सूची की समीक्षा और संशोधन की मांग उठाई जा रही है। लोगों की मांग है कि जारी सूची की दोबारा जांच की जाए और यदि आरक्षण संबंधी कोई त्रुटि पाई जाती है, तो नियमों के अनुरूप संशोधित सूची जारी की जाए।

समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आरक्षण रोस्टर, वर्गवार पदों और संबंधित नियमों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही, यदि सूची में किसी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी त्रुटि हुई है तो उसे समय रहते दूर किया जाना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने इस मामले में उच्च अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने और आवश्यकता पड़ने पर ज्ञापन सौंपने की बात कही है। कुछ लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग भी की है।

फिलहाल जिला प्रशासन या जिला पंचायत सीईओ कार्यालय की ओर से SC वर्ग के पदों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सूची में वास्तव में आरक्षण रोस्टर के अनुसार क्या प्रावधान किया गया है और क्या इसमें संशोधन की आवश्यकता है, यह प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण और संबंधित भर्ती दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।