बालकोनगर में 56 वर्षों की दुर्गा पूजा परंपरा, पारंपरिक वस्तुओं से सजा अनोखा पंडाल, 280 से अधिक तस्वीरों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बालकोनगर में 56 वर्षों से आयोजित सार्वजनिक दुर्गा पूजा उत्सव इस बार विशेष पारंपरिक थीम के साथ मनाया जा रहा है। सेक्टर-3 स्थित दुर्गा पंडाल को सूप, टोकरी, हाथ के पंखे और अन्य पारंपरिक वस्तुओं से सजाया गया है। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश सिंह ने पूजा का शुभारंभ किया। उत्सव के दौरान 280 से अधिक तस्वीरों की फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बालकोनगर में नवरात्रि के अवसर पर आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। बालकोनगर के सेक्टर-3 स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में मां आदिशक्ति की प्रतिमा की स्थापना हर्षोल्लास और भव्यता के साथ की गई है। इस वर्ष पंडाल की विशेष थीम लोगों को पुराने समय की जीवनशैली और पारंपरिक संस्कृति से परिचित करा रही है। सूप, टोकरी, हाथ के पंखे, गमछे और अन्य घरेलू वस्तुओं से सजा पंडाल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
बालको सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा आयोजित इस उत्सव की परंपरा 56 वर्षों पुरानी है। बालकोनगर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान बन चुका यह आयोजन हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इस बार 16 से 19 अक्टूबर तक चार दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव आयोजित किया जा रहा है। पूजा का शुभारंभ बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह ने किया। उन्होंने बालको परिवार के सदस्यों के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर कंपनी और क्षेत्र की निरंतर प्रगति, सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की।
इस वर्ष दुर्गा पूजा पंडाल की सजावट को विशेष रूप से भारतीय परंपराओं और पुराने समय की जीवनशैली पर केंद्रित किया गया है। पंडाल के अंदर सूप, टोकरी, हाथ के पंखे, गमछे, बोरे और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अनेक पारंपरिक वस्तुओं को सजावट का हिस्सा बनाया गया है। इन वस्तुओं के माध्यम से उस दौर की झलक प्रस्तुत की गई है, जब लोग सीमित संसाधनों के बीच सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करते थे।
पंडाल की यह थीम केवल आकर्षक सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पूर्वजों की जीवनशैली से परिचित कराने का प्रयास भी है। आधुनिक समय में उपयोग से दूर होती जा रही पारंपरिक वस्तुओं को प्रदर्शित कर उनके ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व को सामने लाया गया है। यह आयोजन लोगों को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश दे रहा है।
बालकोनगर का सार्वजनिक दुर्गा पूजा उत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का भी प्रतीक है। बालकोनगर सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने और पंडाल की आकर्षक सजावट देखने पहुंच रहे हैं। सामूहिक सहभागिता के माध्यम से यह आयोजन लोगों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
दुर्गा पूजा उत्सव के साथ बालको द्वारा पंडाल के समीप चार दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है। इस प्रदर्शनी में बालको परिवार के सदस्यों द्वारा खींचे गए 280 से अधिक उत्कृष्ट छायाचित्र प्रदर्शित किए गए हैं। तस्वीरों में बालकोनगर की प्राकृतिक सुंदरता, बादलों, बारिश, धरती और जीवन के विभिन्न रंगों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
फोटोग्राफी प्रदर्शनी बालको परिवार के सदस्यों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रही है। प्रदर्शित तस्वीरें प्रकृति और आसपास के वातावरण को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखने का अवसर देती हैं। इससे कला और फोटोग्राफी के प्रति रुचि रखने वाले लोगों को भी प्रेरणा मिल रही है।
कुल मिलाकर, बालकोनगर में आयोजित सार्वजनिक दुर्गा पूजा उत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और रचनात्मकता का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया है। 56 वर्षों की गौरवशाली परंपरा, पारंपरिक वस्तुओं से सजा पंडाल और 280 से अधिक तस्वीरों की प्रदर्शनी इस आयोजन को विशेष बना रही है। यह उत्सव नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ सामुदायिक एकता और कला के संरक्षण का संदेश भी दे रहा है।