शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत बहेसर, तहसील तिल्दा, जिला रायपुर में स्थित खसरा नंबर 83 की भूमि पर कथित रूप से प्लॉट काटे जाने और बिक्री किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसी मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने 22 सितंबर 2026 को संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में भूमि की जांच कराने के साथ यह पता लगाने की मांग की गई कि नहर निर्माण के लिए अर्जित भूमि का वर्तमान में किस तरह उपयोग किया जा रहा है।
शिकायत के बाद भाटापारा शाखा नहर निर्माण उप संभाग क्रमांक-3, तिल्दा-नेवरा के अनुविभागीय अधिकारी ने 28 सितंबर 2026 को तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को पत्र भेजा। विभागीय पत्र में बताया गया है कि खसरा नंबर 83 का कुल रकबा 5.54 एकड़ है। पत्र के अनुसार यह भूमि भाटापारा शाखा नहर निर्माण के लिए अर्जित की गई है।
विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित कार्यालय में उक्त भूमि का भू-राजस्व नक्शा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नहर निर्माण के लिए अर्जित भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल और मौके की स्थिति स्पष्ट करने के लिए खसरा नंबर 83 का सीमांकन कराने का अनुरोध किया गया है। सीमांकन के दौरान राजस्व निरीक्षक और पटवारी की मौजूदगी की बात भी पत्र में कही गई है।
अब इस मामले में सीमांकन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमांकन की कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि खसरा नंबर 83 में नहर निर्माण के लिए कितनी भूमि अर्जित की गई थी और वर्तमान में मौके पर उस भूमि की स्थिति क्या है। साथ ही शिकायत में लगाए गए प्लॉटिंग के आरोपों की भी मौके की स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जा सकेगी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भूमि दलालों और कथित भू-माफियाओं द्वारा नहर के लिए अर्जित भूमि पर प्लॉट काटकर बिक्री का प्रयास किया गया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच और सीमांकन रिपोर्ट से होना बाकी है। फिलहाल विभागीय पत्र में भूमि के सीमांकन की आवश्यकता जताई गई है।
शिकायतकर्ता की मांग है कि यदि जांच और सीमांकन में नहर निर्माण के लिए अर्जित भूमि पर अवैध प्लॉटिंग या बिक्री की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही भूमि के दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कराने की मांग की गई है।
फिलहाल खसरा नंबर 83 की 5.54 एकड़ भूमि को लेकर मामला राजस्व जांच और सीमांकन की प्रक्रिया पर केंद्रित है। सीमांकन रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और भूमि का वर्तमान उपयोग राजस्व एवं अधिग्रहण संबंधी रिकॉर्ड के अनुरूप है या नहीं।