कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, मंत्री केदार कश्यप, मंत्री टंक राम वर्मा, विधायक प्रबोध मिंज सहित अनेक जनप्रतिनिधि, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, समाजसेवी और नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले चिकित्सकों, अंगदान का संकल्प लेने वाले नागरिकों और नियमित रक्तदाताओं को भी सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधायक अनुज शर्मा और उनकी धर्मपत्नी को अंगदान का संकल्प लेने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि अंगदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद पैदा कर सकता है। मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण विरासत बताते हुए आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।
अंगदान का संकल्प लेने के बाद अनुज शर्मा ने इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय अवसर बताया। उन्होंने कहा कि मरणोपरांत अंगदान के माध्यम से जरूरतमंद व्यक्ति को जीवन का अवसर मिल सकता है। उन्होंने अंगदान को समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानव सेवा से जुड़ा संकल्प बताया।
अनुज शर्मा ने महर्षि दधीचि की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में त्याग और सेवा की भावना का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने लोगों से रक्तदान और अंगदान जैसे सामाजिक कार्यों के प्रति जागरूक होने की अपील की।
आयुर्वेद सेवा सम्मेलन में वक्ताओं ने आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा परंपरा, जनस्वास्थ्य में उसके योगदान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के विस्तार पर चर्चा की। साथ ही अंगदान और रक्तदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम में अंगदान और रक्तदान को मानव सेवा से जोड़ते हुए लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित किया गया। विधायक दंपति द्वारा लिया गया मरणोपरांत अंगदान का संकल्प इसी दिशा में सामाजिक जागरूकता का संदेश देता है।