भिलाई: खुर्सीपार के स्कूल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ी लोकगीत की प्रस्तुति, विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना

भिलाई के खुर्सीपार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेक्टर-11 के प्राथमिक विभाग में नवाचारी शिक्षक कामता साहू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों से छत्तीसगढ़ी जस लोकगीत की प्रस्तुति कराई। विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति की प्रधान पाठक ग्लोरिया बड़ा ने सराहना की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति स्थानीय लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर देती है।

Oct 13, 2026 - 16:09
 0  4
भिलाई: खुर्सीपार के स्कूल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ी लोकगीत की प्रस्तुति, विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना

UNITED NEWS OF ASIA. लोकेश्वर सिंह ठाकुर, भिलाई l छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भिलाई के खुर्सीपार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेक्टर-11 के प्राथमिक विभाग में एक विशेष गतिविधि आयोजित की गई। यहां नवाचारी शिक्षक कामता साहू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप विद्यार्थियों से छत्तीसगढ़ी जस लोकगीत की प्रस्तुति कराई। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को स्थानीय लोकसंस्कृति, पारंपरिक गीतों और कला के महत्व से परिचित कराने का प्रयास किया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप कला शिक्षा पर जोर

विद्यालय में आयोजित इस गतिविधि में विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी जस लोकगीत प्रस्तुत किया। बच्चों की प्रस्तुति ने स्थानीय लोककला और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनकी रुचि को सामने रखा। शिक्षक कामता साहू की इस पहल को शिक्षा के साथ स्थानीय संस्कृति को जोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के अतिरिक्त अपनी क्षेत्रीय परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को समझने का अवसर प्रदान करती हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा को विद्यार्थियों के जीवन, स्थानीय परिवेश और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इसी दिशा में लोकगीत और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों को विद्यालयी शिक्षा का हिस्सा बनाना बच्चों के सीखने के अनुभव को अधिक रोचक और व्यावहारिक बना सकता है। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति में जस लोकगीत का अपना विशेष स्थान है। विद्यार्थियों के माध्यम से ऐसी परंपराओं की प्रस्तुति नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बन सकती है।

प्रधान पाठक ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना की

विद्यालय की प्रधान पाठक ग्लोरिया बड़ा ने विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति स्थानीय लोककला के संरक्षण पर जोर देती है। शिक्षा के साथ लोकगीत, लोककला और क्षेत्रीय परंपराओं को जोड़ने से विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति के बारे में जानने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।

विद्यालय में इस प्रकार की गतिविधियों के आयोजन से बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर भी मिलता है। सामूहिक प्रस्तुति के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास, सहभागिता और सांस्कृतिक समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, स्थानीय कला और परंपराओं से परिचय विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान के महत्व को समझने का अवसर देता है।

स्थानीय संस्कृति को शिक्षा से जोड़ने की पहल

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेक्टर-11, खुर्सीपार के प्राथमिक विभाग में आयोजित यह प्रस्तुति शिक्षा और लोकसंस्कृति के समन्वय का उदाहरण है। नवाचारी शिक्षक कामता साहू के प्रयास से विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ी जस लोकगीत प्रस्तुत करने का अवसर मिला। प्रधान पाठक ग्लोरिया बड़ा ने भी इस पहल की सराहना करते हुए स्थानीय लोककला के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया।

इस गतिविधि के माध्यम से विद्यालय में कला आधारित शिक्षा और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया। ऐसी पहलें विद्यार्थियों को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय लोककला के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ाने में सहायक हो सकती हैं।