कांकेर: कानागांव में गायता जोहारनी कार्यक्रम के बाद ग्राम सभा का फैसला, पास्टर-पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध का बोर्ड लगाया
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक स्थित ग्राम पंचायत कानागांव में आदिवासी गोंडवाना समाज के तत्वावधान में सेक्टर स्तरीय गायता जोहारनी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज की परंपरा, संस्कृति और मूल अस्मिता के संरक्षण पर जोर दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, पारंपरिक ग्राम सभा में कथित अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों पर चिंता जताते हुए पास्टर-पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया और गांव के प्रवेश द्वार पर सूचना बोर्ड लगाया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. कांकेर/अंतागढ़। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कानागांव में आदिवासी गोंडवाना समाज के तत्वावधान में सेक्टर स्तरीय गायता जोहारनी कार्यक्रम आयोजित किया गया। रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को हुए इस आयोजन में क्षेत्र के सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता, सियान और समाज प्रमुख शामिल हुए। कार्यक्रम पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हर्षोल्लास से संपन्न हुआ। इस दौरान समाज की प्राचीन परंपराओं, सभ्यता, संस्कृति और मूल अस्मिता के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया गया।
गोंडवाना संस्कृति के संरक्षण पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान समाज प्रमुखों ने आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। समाज के प्रतिनिधियों ने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र और पेसा कानून के अंतर्गत आने वाले इलाकों में कथित अवैध धर्मांतरण की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई। उनका आरोप है कि कुछ बाहरी पास्टर और पादरी क्षेत्र में धर्मांतरण को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
पारंपरिक ग्राम सभा में लिया गया निर्णय
जनजातीय संस्कृति और सामाजिक परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से कानागांव में ग्रामीणों और गोंडवाना समाज की ओर से पारंपरिक ग्राम सभा आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई। इसमें कथित धर्मांतरण गतिविधियों पर रोक लगाने के विषय पर चर्चा हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा में सर्वसम्मति से गांव की सीमा में पास्टर एवं पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया।
इस निर्णय की जानकारी सार्वजनिक करने और इसे लागू करने के उद्देश्य से गांव के मुख्य प्रवेश द्वार तथा सीमा क्षेत्र में सूचना बोर्ड भी लगाया गया है। ग्रामीणों और समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे अपनी पारंपरिक व्यवस्था, आस्था और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
पेसा कानून और संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला
गोंडवाना समाज के प्रतिनिधियों ने अपने निर्णय के समर्थन में पेसा कानून और पारंपरिक ग्राम सभा की व्यवस्था का हवाला दिया। उनका कहना है कि आदिवासी समुदाय को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक पहचान के संरक्षण का अधिकार है। समाज के अनुसार, क्षेत्र में किसी भी ऐसी गतिविधि को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उनकी पारंपरिक आस्था और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो।
प्रशासनिक और कानूनी पहलू महत्वपूर्ण
कानागांव में लगाए गए सूचना बोर्ड और ग्राम सभा के निर्णय को लेकर प्रशासनिक तथा कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण हैं। किसी भी प्रतिबंध की वैधता संबंधित कानूनों और सक्षम प्राधिकारियों के नियमों के अनुरूप ही तय होती है। पेसा कानून के प्रावधानों के साथ-साथ सभी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखना आवश्यक है।
गायता जोहारनी कार्यक्रम के माध्यम से गोंडवाना समाज ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। वहीं, ग्राम सभा के निर्णय और लगाए गए बोर्ड के संबंध में आगे की स्थिति संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई तथा लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।