छत्तीसगढ़ के हर अनुविभाग में लगे प्रदूषण जांच मशीन, ललित नरेटी ने परिवहन मंत्री को लिखा पत्र

छत्तीसगढ़ में प्रत्येक अनुविभाग स्तर पर वाहन प्रदूषण जांच मशीन स्थापित करने की मांग उठी है। सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी ने परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर स्थायी मशीनें लगाने तथा सुविधा उपलब्ध होने तक मोबाइल PUC वैन के माध्यम से शिविर आयोजित करने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच केंद्रों की कमी के कारण वाहन चालकों को 40 से 60 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं होने पर 1,000 से 3,000 रुपये तक के चालान का सामना करना पड़ रहा है।

Oct 16, 2026 - 08:57
 0  6
छत्तीसगढ़ के हर अनुविभाग में लगे प्रदूषण जांच मशीन, ललित नरेटी ने परिवहन मंत्री को लिखा पत्र

UNITED NEWS OF ASIA. राजेंद्र मंडावी, कांकेर l छत्तीसगढ़ में वाहन प्रदूषण जांच की सुविधा को लेकर सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष ललित नरेटी ने महत्वपूर्ण मांग उठाई है। उन्होंने प्रदेश के प्रत्येक अनुविभाग स्तर पर स्थायी वाहन प्रदूषण जांच मशीन स्थापित करने की मांग करते हुए परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि प्रदूषण जांच केंद्रों की कमी के कारण आम वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समय पर प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं बन पाने से कई वाहन चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ललित नरेटी ने पत्र में उल्लेख किया है कि छत्तीसगढ़ में लाखों की संख्या में दोपहिया और चार पहिया वाहन पंजीकृत हैं। इन वाहनों का उपयोग आम नागरिक प्रतिदिन आवागमन, रोजगार, व्यवसाय और अन्य जरूरी कार्यों के लिए करते हैं। नियमानुसार वाहनों के लिए प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र यानी पीयूसी (PUC) होना आवश्यक है। यह प्रमाणपत्र वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण की जांच और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रदेश के कई अनुविभाग और विकासखंड स्तर पर जांच मशीनों की उपलब्धता नहीं होने से वाहन चालकों को काफी दिक्कतें हो रही हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदूषण जांच की सुविधा मुख्य रूप से जिला मुख्यालयों तक सीमित होने के कारण ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के वाहन चालकों को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लगभग 40 से 60 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। इससे उनका समय और ईंधन दोनों खर्च होते हैं। कई बार दूरी और अन्य व्यावहारिक समस्याओं के कारण वाहन चालक समय पर प्रदूषण जांच नहीं करा पाते। ऐसी स्थिति में जांच के दौरान पीयूसी प्रमाणपत्र नहीं मिलने पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा चालानी कार्रवाई की जाती है।

ललित नरेटी के अनुसार, बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के पकड़े जाने पर वाहन चालकों के खिलाफ 1,000 से 3,000 रुपये तक के ई-चालान काटे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि जांच की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं होने के बावजूद वाहन चालकों को आर्थिक दंड का सामना करना पड़ रहा है। इससे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि शासकीय और निजी वाहनों के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त जांच सुविधाएं होना जरूरी है।

ललित नरेटी ने शासन से मांग की है कि प्रदेश के सभी अनुविभागों में स्थायी प्रदूषण जांच मशीनें स्थापित की जाएं। जब तक स्थायी व्यवस्था नहीं बनती, तब तक मोबाइल पीयूसी वैन के माध्यम से प्रत्येक विकासखंड में सप्ताह में कम से कम एक दिन शिविर आयोजित किया जाए। इसके साथ ही प्रदूषण जांच की दरें निर्धारित कर उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए, ताकि वाहन चालकों को शुल्क की स्पष्ट जानकारी मिल सके। उन्होंने आम नागरिकों को पीयूसी प्रमाणपत्र की उपयोगिता और समय पर जांच कराने के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया है।

उन्होंने कहा कि अनुविभाग स्तर पर प्रदूषण जांच की सुविधा उपलब्ध होने से वाहन चालकों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी। साथ ही, समय पर प्रदूषण जांच होने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और नियमानुसार प्रमाणपत्र बनवाने वाले वाहन चालकों की संख्या बढ़ सकती है। अब देखना होगा कि परिवहन विभाग इस मांग पर क्या कदम उठाता है और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रदूषण जांच की सुविधा बढ़ाने के लिए किस तरह की व्यवस्था की जाती है।