उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में गौरैया संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम, बच्चों को दिए घोंसले और खेल सामग्री

गरियाबंद के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के तहत स्कूली बच्चों के लिए पक्षी संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुल्हाड़ीघाट और दक्षिण उदंती परिक्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को गौरैया सहित विभिन्न पक्षियों के संरक्षण, घोंसलों की सुरक्षा और दाना-पानी की व्यवस्था की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को मिट्टी व लकड़ी से बने घोंसले, टी-शर्ट, स्वेटर और खेल सामग्री भी वितरित की गई।

Oct 8, 2026 - 15:08
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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में गौरैया संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम, बच्चों को दिए घोंसले और खेल सामग्री

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद। वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के अंतर्गत उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पक्षी संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। 6 अक्टूबर को कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र के हॉर्नबिल ग्राम ओड़ तथा दक्षिण उदंती परिक्षेत्र के उड़न गिलहरी ग्राम बम्हनीझोला स्थित प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में आयोजित कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को गौरैया सहित विभिन्न पक्षियों के संरक्षण और जैव विविधता के महत्व की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में गौरैया पक्षी संरक्षण कार्यकर्ता मोहन साहू और उनकी टीम ने विद्यार्थियों से संवाद किया। बच्चों को बताया गया कि पक्षियों का प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान है। इस दौरान गौरैया सहित अन्य पक्षियों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा, घोंसलों को सुरक्षित रखने तथा गर्मी और अन्य परिस्थितियों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने से संबंधित जानकारी दी गई।

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को पक्षियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। बच्चों को समझाया गया कि आसपास के पर्यावरण को सुरक्षित रखने और पक्षियों के प्राकृतिक आवास की रक्षा करने में स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में बचपन से ही प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को मिट्टी और लकड़ी से बने घोंसले भी प्रदान किए गए। इन घोंसलों का उद्देश्य पक्षियों के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के प्रति बच्चों और स्थानीय समुदाय को प्रोत्साहित करना रहा। इसके साथ ही विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन और आवश्यक सहयोग के उद्देश्य से टी-शर्ट, स्वेटर और खेल सामग्री का वितरण भी किया गया।

कार्यक्रम में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन, सहायक संचालक जे.पी. दर्रो, गोपाल कश्यप, बालगोविंद साहू, बी.एस. राजपूत, वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. राकेश वर्मा, वन परिक्षेत्राधिकारी दिनेश चौधरी, के.आर. कोरचे, सुशील सागर, चंद्रबली ध्रुव, ज्योति ध्रुव, कविता ठाकुर और अनामिका वर्मा सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। संबंधित ग्रामों के शिक्षक, सरपंच और ग्रामीणजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों को पक्षियों और वन्यजीवों के संरक्षण से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस तरह की गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक जानकारी देने के साथ उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास किया गया। बच्चों की सहभागिता से यह संदेश दिया गया कि जैव विविधता का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और स्थानीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है।

वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के तहत आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम ने पक्षियों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया। गौरैया जैसे पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसले, दाना-पानी और प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने की जानकारी बच्चों तक पहुंचाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय समुदाय, विशेष रूप से बच्चों को पक्षी एवं वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना और उनमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा।