RTI में दोहरे वित्तीय कुप्रबंधन का महाखुलासा, स्मार्ट सिटी और समग्र शिक्षा के बजट पर गंभीर सवाल

RTI से सामने आई जानकारी का हवाला देते हुए अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने छत्तीसगढ़ में स्मार्ट सिटी मिशन और समग्र शिक्षा अभियान के तहत हुए वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार स्मार्ट सिटी मिशन में करीब ₹1,764 करोड़ और समग्र शिक्षा अभियान में ₹690 करोड़ से अधिक के खर्च तथा अनस्पेंट बजट से जुड़े मामलों में भुगतान और जमीनी कार्यों के बीच अंतर, भौतिक सत्यापन, ऑडिट और उपयोगिता प्रमाण-पत्रों की जांच जरूरी है। उन्होंने पूरे मामले की जांच सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज या EOW से कराने की मांग की है।

Oct 6, 2026 - 11:36
 0  3
RTI में दोहरे वित्तीय कुप्रबंधन का महाखुलासा, स्मार्ट सिटी और समग्र शिक्षा के बजट पर गंभीर सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट सिटी मिशन और समग्र शिक्षा अभियान के तहत हुए वित्तीय प्रबंधन को लेकर RTI के माध्यम से सामने आई जानकारी के आधार पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने दावा किया है कि स्मार्ट सिटी मिशन के करीब ₹1,764 करोड़ तथा समग्र शिक्षा अभियान के ₹690 करोड़ से अधिक के खर्च और अनस्पेंट बजट से जुड़े आंकड़ों की गहन जांच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में जारी राशि, वास्तविक भुगतान और जमीन पर हुए कार्यों के बीच किसी भी तरह के अंतर को स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है।

मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार, पूरे मामले में यह देखना आवश्यक है कि जिन कार्यों के लिए राशि स्वीकृत या भुगतान की गई, वे कार्य वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुरूप जमीन पर हुए हैं या नहीं। इसके लिए संबंधित परियोजनाओं का भौतिक सत्यापन कराने, भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने और खर्च की वास्तविक स्थिति का मिलान करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी रिकॉर्ड में खर्च दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मौके पर कार्य की स्थिति और उसके अनुरूप हुए भुगतान की भी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने स्मार्ट सिटी मिशन से जुड़े करीब ₹1,764 करोड़ के आंकड़े को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक परियोजनाओं पर खर्च की गई राशि, पूर्ण हुए कार्यों, लंबित कार्यों और शेष या अनस्पेंट राशि का स्पष्ट ब्यौरा सार्वजनिक जांच के दायरे में आना चाहिए। साथ ही टेंडर, कार्यादेश, भुगतान, माप पुस्तिका, बिल और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। इन आरोपों और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

इसी तरह समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े ₹690 करोड़ से अधिक के खर्च और अनस्पेंट बजट को लेकर भी वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं। शिक्षा से जुड़ी योजनाओं में जारी राशि का उपयोग किन कार्यों के लिए किया गया, कितनी राशि वास्तव में खर्च हुई और कितनी राशि शेष रही, इसकी विस्तृत पड़ताल की मांग की गई है। इसके साथ ही उपयोगिता प्रमाण-पत्र यानी Utilization Certificate की स्थिति की भी जांच आवश्यक बताई गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित राशि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्यों के अनुसार हुआ या नहीं।

मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि मामले में निष्पक्ष ऑडिट और भौतिक सत्यापन के साथ जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अथवा आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा यानी EOW से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच से वित्तीय लेन-देन, परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति और सरकारी राशि के उपयोग से जुड़े सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि मामले में संतोषजनक जांच नहीं होती है तो आवश्यकता पड़ने पर हाई कोर्ट का रुख करने की भी तैयारी है। फिलहाल RTI से सामने आई जानकारी के आधार पर उठाए गए इन सवालों पर संबंधित विभागों और अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वित्तीय प्रबंधन में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या आंकड़ों की व्याख्या को लेकर विवाद है।