तुलसी नेवरा में वर्षों से जीवंत है रामलीला की परंपरा, बच्चों से बुजुर्गों तक निभा रहे प्रभु श्रीराम के आदर्शों को सहेजने की जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ के तिल्दा के समीप ग्राम पंचायत तुलसी (नेवरा) में श्री रामलीला मंडली द्वारा वर्षों से रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। इस आयोजन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सहभागिता देखने को मिलती है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और धर्म का संदेश ग्रामीणों तक पहुंचाया जाता है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और नई पीढ़ी में संस्कारों के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा नेवरा l छत्तीसगढ़ की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में ग्रामीण क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए तिल्दा के समीप ग्राम पंचायत तुलसी (नेवरा) में श्री रामलीला मंडली तुलसी (नेवरा) द्वारा कई वर्षों से रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। गांव में आयोजित होने वाली यह रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आस्था, भक्ति, संस्कार और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुकी है। भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों को नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास ग्रामीण संस्कृति को नई पहचान दे रहा है।
श्री रामलीला मंडली तुलसी (नेवरा) की सबसे बड़ी विशेषता इसमें सभी आयु वर्ग के लोगों की सहभागिता है। छोटे बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्ग तक इस आयोजन में उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हैं। रामायण के विभिन्न प्रसंगों को आकर्षक झांकियों और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया जाता है। भगवान श्रीराम की मर्यादा, माता सीता का त्याग, लक्ष्मण का समर्पण, हनुमान की भक्ति और धर्म की विजय जैसे प्रसंगों के माध्यम से ग्रामीणों को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का संदेश दिया जाता है।
गांव में रामलीला का आयोजन नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। इसमें भाग लेने वाले बच्चों को रामायण की कथाओं, भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय परंपराओं को समझने का अवसर मिलता है। वहीं, बुजुर्गों का अनुभव और मार्गदर्शन इस आयोजन को अधिक प्रभावशाली बनाता है। अलग-अलग पीढ़ियों का एक मंच पर आना इस परंपरा की सबसे सुंदर विशेषताओं में शामिल है।
श्री रामलीला मंडली के सदस्यों का सामूहिक सहयोग इस आयोजन की सफलता का प्रमुख आधार है। ग्रामीण मिलकर रामायण के प्रसंगों की तैयारी, पात्रों के अभिनय, झांकियों और मंचन से जुड़ी गतिविधियों में योगदान देते हैं। इससे गांव में आपसी सहयोग, भाईचारे और सामुदायिक सहभागिता की भावना मजबूत होती है। रामलीला के माध्यम से धार्मिक संदेश देने के साथ समाज में नैतिक मूल्यों, सत्य, कर्तव्य और सदाचार के महत्व को भी सामने रखा जाता है।
आधुनिक समय में बदलती जीवनशैली और मनोरंजन के नए साधनों के बीच पारंपरिक लोकनाट्य और धार्मिक आयोजनों का संरक्षण महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे दौर में तुलसी (नेवरा) की श्री रामलीला मंडली द्वारा वर्षों से जारी यह पहल सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती है। गांव के लोग अपनी परंपराओं को केवल याद नहीं कर रहे, बल्कि उन्हें मंच पर जीवंत करके आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
रामायण की कथाएं भारतीय समाज में आदर्श जीवन, पारिवारिक मूल्यों, त्याग, समर्पण और धर्म के प्रति निष्ठा का संदेश देती हैं। तुलसी (नेवरा) में आयोजित रामलीला इन्हीं मूल्यों को ग्रामीण जीवन से जोड़ने का कार्य कर रही है। कलाकारों की प्रस्तुतियां और ग्रामीणों की भागीदारी इस आयोजन को विशेष बनाती हैं।
कुल मिलाकर, ग्राम पंचायत तुलसी (नेवरा) में श्री रामलीला मंडली द्वारा निभाई जा रही यह परंपरा आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर संगम है। बच्चों से बुजुर्गों तक की भागीदारी यह संदेश देती है कि जब समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए एकजुट होता है, तो परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत बनी रहती हैं। भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने वाली यह रामलीला ग्रामीण संस्कृति और धार्मिक आस्था की पहचान बनी हुई है।