नकटी-कुम्हारी में कोयला भट्ठा बंद कराने की मांग, ग्रामीणों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
तिल्दा-नेवरा के ग्राम पंचायत नकटी-कुम्हारी में संचालित कोयला भट्ठे को बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने धुएं से सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और तालाब का पानी प्रदूषित होने की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, भट्ठा संचालन के लिए ग्राम पंचायत से एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत नकटी-कुम्हारी में संचालित कोयला भट्ठे को बंद कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने तहसीलदार तिल्दा को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने भट्ठे से निकलने वाले धुएं, पर्यावरण प्रदूषण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, गांव निवासी निलेश गोयल की भूमि पर कोयला भट्ठा संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला बनाने के लिए आसपास के किसानों के खेतों में लगे पेड़ों की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे पेड़ों की कटाई बढ़ने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से लकड़ियों के उपयोग और भट्ठे के संचालन से जुड़े नियमों की जांच करने की मांग की है।
धुएं से सांस लेने में परेशानी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि कोयला निर्माण की प्रक्रिया के दौरान भट्ठे से निकलने वाला धुआं आसपास के क्षेत्र में फैलता है। इससे स्थानीय लोगों को सांस लेने में परेशानी होने और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ने का दावा किया गया है। ग्रामीणों ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वायु गुणवत्ता की जांच कराने तथा जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करने की मांग की है।
इसके अलावा, ग्रामीणों ने गांव के तालाब का पानी प्रदूषित होने की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि जल स्रोतों की स्थिति की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कोयला भट्ठे के संचालन का आसपास के पानी और पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है या नहीं। ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से मौके का निरीक्षण कर आवश्यक जांच कराने की अपील की है।
ग्रामसभा की अनुमति और एनओसी पर उठाए सवाल
ज्ञापन में ग्रामीणों ने कोयला भट्ठा संचालन के लिए ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी जारी किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ग्रामसभा की बैठक के बिना ही एनओसी जारी कर दी गई। ग्रामीणों ने इस मामले में सरपंच, उपसरपंच, पंचों और पंचायत सचिव की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कई विभागों को भेजी ज्ञापन की प्रतिलिपि
ग्रामीणों ने अपनी शिकायत की प्रतिलिपि अनुविभागीय अधिकारी तिल्दा, धरसींवा विधायक, थाना प्रभारी खरोरा, पर्यावरण मंत्रालय रायपुर, जनपद पंचायत तिल्दा और वन विभाग तिल्दा को भी भेजी है। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित विभागों को अपने स्तर पर जांच करनी चाहिए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि कोयला भट्ठे के संचालन से संबंधित अनुमतियों और नियमों की जांच की जाए। साथ ही, प्रदूषण की स्थिति, जल स्रोतों पर संभावित प्रभाव और ग्राम पंचायत से एनओसी जारी करने की प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। ग्रामीणों ने कहा कि जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि गांव में स्वच्छ वातावरण बना रहे और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।