मैनपुर में 5 दिन से लापता बुजुर्ग का जंगल में मिला शव, अंतिम संस्कार के लिए शव वाहन नहीं मिलने पर पैदल ले गए परिजन

गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र में पांच दिन से लापता कमार जनजाति के बुजुर्ग सुमेर सिंह का शव बरडुला के जंगल में पेड़ से लटका मिला। पुलिस ने पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की। परिजनों के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद शव घर ले जाने के लिए मुक्तांजलि वाहन उपलब्ध नहीं हुआ और करीब 2 से 3 घंटे इंतजार करना पड़ा। वाहन नहीं मिलने पर परिवार लकड़ी की बल्ली के सहारे शव को बांधकर पैदल अंतिम संस्कार के लिए ले जाने को मजबूर हुआ। बीएमओ डॉ. गजेंद्र ध्रुव ने बताया कि जिले का मुक्तांजलि वाहन कुड़ेदादर गया हुआ था।

Oct 2, 2026 - 19:31
 0  3
मैनपुर में 5 दिन से लापता बुजुर्ग का जंगल में मिला शव, अंतिम संस्कार के लिए शव वाहन नहीं मिलने पर पैदल ले गए परिजन

UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। पांच दिन से लापता कमार जनजाति के बुजुर्ग सुमेर सिंह का शव बरडुला के जंगल में पेड़ से लटका मिला। परिजनों द्वारा लगातार तलाश किए जाने के बाद शव की पहचान की गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार किया गया। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

बताया गया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन शव को घर ले जाने के लिए मुक्तांजलि वाहन का इंतजार करते रहे। लेकिन तत्काल शव वाहन उपलब्ध नहीं हो सका। परिजनों के अनुसार करीब 2 से 3 घंटे तक अस्पताल में इंतजार करने के बावजूद उन्हें शव को घर ले जाने के लिए वाहन नहीं मिला। निजी वाहन की व्यवस्था करने का भी प्रयास किया गया, लेकिन तत्काल निजी वाहन उपलब्ध नहीं हो सका।

स्थिति ऐसी बनी कि परिवार को शव को घर ले जाने के लिए स्वयं व्यवस्था करनी पड़ी। परिजनों ने लकड़ी की बल्ली के सहारे शव को बांधा और पैदल ही अंतिम संस्कार के लिए ले जाने को मजबूर हुए। इस घटना ने दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्र में शव परिवहन की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले को लेकर बीएमओ डॉ. गजेंद्र ध्रुव के अनुसार जिले का मुक्तांजलि वाहन उस समय कुड़ेदादर गया हुआ था। इसी वजह से वाहन तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका। हालांकि, इस स्थिति के बाद क्षेत्र में आपात परिस्थितियों के लिए वैकल्पिक शव वाहन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मैनपुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था की उपलब्धता लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रही है। ऐसे क्षेत्रों में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद शव को अस्पताल से घर अथवा अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर तब जब उनके पास निजी वाहन की सुविधा उपलब्ध न हो।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब क्षेत्र का निर्धारित मुक्तांजलि वाहन किसी अन्य स्थान पर गया हुआ था, तब आपात स्थिति के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों उपलब्ध नहीं थी। परिजनों को शव लेकर पैदल जाने की स्थिति का सामना करना पड़ा, जिसने स्थानीय स्वास्थ्य और शव परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता सामने रखी है।

मैनपुर क्षेत्र में इससे पहले भी एंबुलेंस और शव परिवहन की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने की बात सामने आती रही है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ आपातकालीन परिवहन व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

फिलहाल सुमेर सिंह की मौत की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शव बरडुला के जंगल में मिला था। वहीं, शव को घर ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को जिस स्थिति का सामना करना पड़ा, उसने क्षेत्र की स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।