छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा, होमस्टे और चेन्दरू पुरस्कार से गांवों को मिलेगी नई पहचान

छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से पर्यटन को प्रोत्साहित कर रही है। होमस्टे नीति 2025-30, पर्यटन को उद्योग का दर्जा और चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार जैसी पहलों के माध्यम से गांवों की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, लोककला और पारंपरिक जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

Oct 11, 2026 - 11:49
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छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा, होमस्टे और चेन्दरू पुरस्कार से गांवों को मिलेगी नई पहचान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, पहाड़ों, नदियों, जलप्रपातों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। राज्य सरकार इन विशेषताओं को पर्यटन के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उनके अपने गांव में ही आय के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

होमस्टे नीति से गांवों को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार ने जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति तैयार की है। इसके माध्यम से स्थानीय परिवार अपने घरों को पर्यटकों के ठहरने योग्य बनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। पर्यटकों को गांवों में रहकर स्थानीय भोजन, लोककला, हस्तशिल्प, पारंपरिक रीति-रिवाजों और ग्रामीण जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। नीति में होमस्टे की स्थापना, मौजूदा आवासों के उन्नयन तथा संचालकों को आतिथ्य, स्वच्छता और व्यवसाय संचालन का प्रशिक्षण देने जैसे प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।

चेन्दरू पुरस्कार से ग्रामीण पर्यटन के नायकों को पहचान

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार की शुरुआत की है। यह पुरस्कार बस्तर के चेन्दरू मंडावी की स्मृति में शुरू किया गया है, जिन्हें ‘टाइगर बॉय’ के नाम से जाना जाता था। उनका जीवन और बाघ ‘टेंबू’ के साथ जुड़ी कहानी छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने से जुड़ी रही है।

इस पुरस्कार के तहत ग्रामीण पर्यटन, लोककला, हस्तशिल्प और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में योगदान देने वाले व्यक्तियों तथा संस्थाओं को सम्मानित करने का प्रावधान है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चयनित विजेताओं को एक लाख रुपये की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उन स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित करना है, जो पर्यटन के माध्यम से अपने गांव और क्षेत्र की पहचान मजबूत कर रहे हैं।

पर्यटन को उद्योग का दर्जा

छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024-2030 में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। इससे पर्यटन आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने और निवेश की संभावनाएं बढ़ाने पर जोर है। पर्यटन अधोसंरचना, आवास, परिवहन और पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

बस्तर से सरगुजा तक पर्यटन की संभावनाएं

बस्तर का प्रसिद्ध दशहरा, चित्रकोट जलप्रपात, घने वन, जनजातीय परंपराएं और सरगुजा के प्राकृतिक स्थल राज्य की पर्यटन पहचान के प्रमुख आकर्षण हैं। ग्रामीण और जनजातीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्पियों, गाइडों और होमस्टे संचालकों को लाभ मिलने की संभावनाएं हैं।

पर्यटन के विकास से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। सरकार की इन पहलों का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नए अवसर उपलब्ध कराना है।